Madhya Pradesh Religious Freedom Bill -2021, Love Jihad, Madhya Pradesh, Madhya Pradesh Assembly, NEWS भोपाल:  मध्य प्रदेश की भाजपा नीत सरकार ने कथित ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2021’ सोमवार को सदन में पेश किया. विधानसभा में राज्य के विधि विधाई और गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सोमवार को सदन में मप्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2021 पेश करने की विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम से अनुमति मांगी, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने अनुमति दी. इसके बाद यह विधेयक सदन में पेश किया गया.Also Read - बीजेपी नेता वीडियो में जिस शख्‍स को थप्पड़ मारते दिखा, बाद में उसका शव रोड पर मिला

इस विधेयक के जरिए शादी तथा किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण के मामले में अधिकतम 10 साल की कैद एवं जुर्माने का प्रावधान किया गया है. Also Read - मध्य प्रदेश: OBC महासभा का आज 'राज्य बंद' का आह्वान, कांग्रेस ने किया समर्थन का ऐलान

सदन में पारित होने के बाद यह कानून 9 जनवरी को अधिसूचित ‘मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020’ की जगह लेगा. प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस विधेयक को सदन में पेश किया. Also Read - MP News: शादी समारोह से लौट रहे 10 लोगों को ट्रक ने कुचला, एक मासूम सहित तीन की मौत

मध्य प्रदेश विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह पहला चरण है. अब इस विधेयक पर चर्चा होगी. सदन ने इसे पेश करने की अनुमति दी है. सदस्य इसका अध्ययन कर सकते हैं और संशोधन दे सकते हैं.”

मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नौ जनवरी को इस ‘धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020’को स्वीकृति प्रदान की थी. इस कानून के जरिए शादी और किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण के मामले में अधिकतम 10 साल की कैद एवं भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

इस कानून में प्रावधान है कि धर्म परिवर्तन कराने संबंधी प्रयास किए जाने पर प्रभावित व्यक्ति स्वयं, उसके माता-पिता अथवा रक्त संबंधी इसके विरुद्ध शिकायत कर सकेंगे. यह अपराध संज्ञेय, गैर जमानती तथा सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होगा. उप पुलिस निरीक्षक से कम श्रेणी का पुलिस अधिकारी इसका अन्वेषण नहीं कर सकेगा. धर्मातरण नहीं किया गया है, यह साबित करने का भार अभियुक्त पर होगा.

इस कानून में एक से पांच वर्ष का कारावास व कम से कम 25 हजार रुपए का अर्थदंड होगा. नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति‍, अनुसूचित जनजाति के प्रकरण में दो से 10 वर्ष के कारावास तथा कम से कम 50 हजार रुपए अर्थदंड प्रस्तावित किया गया है. इसी प्रकार अपना धर्म छुपाकर ऐसा प्रयास करने पर तीन वर्ष से 10 वर्ष का कारावास एवं कम से कम 50 हजार रुपये अर्थदंड होगा. सामूहिक धर्म परिवर्तन (दो या अधिक व्यक्ति का) का प्रयास करने पर पांच से 10 वर्ष के कारावास एवं कम से कम एक लाख रुपए के अर्थदंड का प्रावधान है.

राज्य सरकार ने जनवरी 2021 में बहला-फुसलाकर, डरा-धमका कर विवाह के माध्यम से या अन्य किसी कपटपूर्ण साधन से प्रत्यक्ष अथवा अन्यथा धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए अध्यादेश लाकर कानून को अमल में लाया था. अब विधानसभा में विधेयक पेश किया गया है.