भोपाल: मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच भाजपा ने तत्‍काल फ्लोर टेस्‍ट करवाने के लिए सोमवार को राज्यपाल के सामने अपने 106 विधायकों की परेड कराई. पार्टी ने कमलनाथ सरकार को अल्पमत करार देते हुए कार्रवाई की मांग की. इस पर राज्यपाल ने विधायकों को उनके साथ न्याय होने का भरोसा दिलाया है. Also Read - दिग्विजय सिंह अमर्यादित भाषा वाले आ रहे कॉल्‍स से हुए परेशान, बंद किया मोबाइल फोन

बता दें कि विधानसभाध्यक्ष एन.पी. प्रजापति ने सोमवार को शुरू हुए विधानसभा सत्र में राज्यपाल का अभिभाषण समाप्त होने के बाद कोरोनावायरस के चलते विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित कर दी. इसके खिलाफ भाजपा के 106 विधायक तत्काल शक्ति परीक्षण की मांग को लेकर मध्य प्रदेश राज्यपाल के निवास पर पहुंचे. Also Read - Coronavirus को लेकर राम गोपाल वर्मा ने किया भद्दा मज़ाक, यूजर्स बोले- थोड़ी तो शरम करो, पुलिस लेगी एक्शन

बीजेपी ने 106 विधायकों का समर्थन-पत्र राज्यपाल को सौंपा, साथ ही विधायकों की परेड कराई. भाजपा के पास 107 विधायक हैं. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कमलनाथ की सरकार अल्पमत में है और उसे सिर्फ 92 विधायकों का समर्थन हासिल है, जबकि भाजपा के पास बहुमत है. Also Read - कोरोना संकट के खिलाफ जंग में जुटी महिला डॉक्‍टरों पर किया था हमला, 7 आरोपी गिरफ्तार

पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज ने कहा, “भाजपा ने राज्यपाल के सामने विधायकों को प्रस्तुत किया. जबकि कमलनाथ सरकार बहुमत साबित करने से भाग रही है. राज्यपाल ने आश्वस्त किया है कि विधायकों के संवैधानिक हितों की रक्षा करेंगे. हम लोगों ने इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया है.”

इसके पहले राज्य विधानसभा का बजट सत्र राज्यपाल लालजी टंडन के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ. राज्यपाल ने अभिभाषण का एक पैरा ही पढ़ा. उसके बाद हंगामा हुआ तो कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित की गई. फिर कोरोनावायरस को ध्यान में रखकर कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई.

भाजपा ने विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगित किए जाने का विरोध किया है. इसी को लेकर भाजपा विधायक बस में सवार होकर राजभवन पहुंचे. भाजपा के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कमलनाथ सरकार को अल्पमत की सरकार दरार दिया है.

राज्यपाल से मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ कमलनाथ सरकार बहुमत खो कर अल्पमत में आ चुकी है और इसलिए राज्यपाल ने उसे आज 16 तारीख को ही राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद शक्ति परीक्षण कराने का आदेश दिया था.’’भाजपा ने इस अवसर पर उपस्थित 106 भाजपा विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित शपथपत्र भी राज्यपाल को सौंपा.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल किया ‘‘बहुमत होता तो सरकार को शक्ति परीक्षण कराने में दिक्कत क्या थी ? लेकिन मुख्यमंत्री बच रहे हैं और समय काट रहे हैं क्योंकि वह जानते हैं कि उनकी सरकार अल्पमत में है. इसलिए राज्यपाल के निर्देश का पालन नहीं किया और सरकार रणछोड़दास बन गई. सत्र स्थगित करके भाग गई.’’

चौहान ने कहा ‘‘अब इस सरकार को एक क्षण भी सत्ता में रहने का संवैधानिक अधिकार नहीं है. आज जो सदन में परिदृष्य था, उसको ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के पास केवल 92 विधायक हैं जबकि भाजपा के 106 विधायक यहां आए हैं. यह बिल्कुल स्पष्ट है कि बहुमत अब भाजपा का है.’’

भाजपा नेता ने कहा ‘‘इसीलिए हमने राज्यपाल के सामने हमने परेड की है कि बहुमत देख लीजिए.’’ कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर बैठक स्थगित किए जाने के सवाल पर चौहान ने कहा ‘‘यह तो अस्थिर सरकार है. कोरोना वायरस से बचाव के लिए तो स्थिर सरकार की जरुरत है.’’

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, राज्यपाल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि हमारे, प्रदेश के, जनता के और विशेषकर विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेंगे. उन्होंने बताया ‘‘हम देश की सर्वोच्च अदालत में भी इस मामले को लेकर गए हैं.’’

बता दें कि मध्य प्रदेश में चल रहे राजनीतिक संकट के हल के लिये प्रदेश की कमलनाथ सरकार को विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने का निर्देश देने के अनुरोध के साथ राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से सोमवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई. मध्यप्रदेश में भाजपा के कुल 107 विधायक हैं. राज्यपाल के सामने आज मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी उपस्थित नहीं थे.