नई दिल्ली: राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए तमाम दावे हो रहे हैं. बीजेपी और कांग्रेस दोनों की पार्टियां बातें बड़ी-बड़ी करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. राजनीति में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल लटका पड़ा है. पार्टियां भले ही बड़े बड़े दावे करें लेकिन महिलाओं को टिकट देने में बहुत पीछे हैं. मध्यप्रदेश विधानसभा के पिछले दो चुनावों की बात करें तो किसी भी पार्टी ने महिलाओं को 10 प्रतिशत से ज्यादा टिकट नहीं दिया. इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का एलान हो चुका है. कुछ दिनों में ही पार्टियां अपने उम्मीदवारों का एलान करने वाली हैं. ऐसे में देखने होगा कि ये आंकड़े बदलते हैं या नहीं. Also Read - मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस के गंभीर हालात के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार जिम्मेदार: नरोत्तम मिश्रा

ये है दो चुनावों का आंकड़ा
पार्टियां 2008 2013
बीजेपी 25 28
कांग्रेस 37 23
बीएसपी 26 22
अन्य 67 74
निर्दलीय 66 53
(पार्टियों ने इस संख्या में महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया) Also Read - दिल्ली में बोले शिवराज, भोपाल पहुंचने पर करूंगा विभागों का बंटबारा

2008 के विधानसभा चुनाव में 2958 पुरुष उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई जिनमें से 206 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. जीत का प्रतिशत 6.90 रहा. वहीं 221 महिला उम्मीदवारों में से 24 ने जीत हासिल की. उनकी जीत का प्रतिशत 10.80 प्रतिशत रहा. वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में 2383 पुरुष उम्मीदवार मैदान में उतरे इनमें से 200 ने जीत हासिल की. उनके जीत का प्रतिशत 8.30 रहा. वहीं 200 महिला उम्मीदवारों में से 30 विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहीं. उनकी जीत का प्रतिशत 15 रहा. अगर जीत के प्रतिशत को देखें तो पुरुष उम्मीदवारों की तुलना में महिलाओं का प्रदर्शन अच्छा रहा. Also Read - मध्य प्रदेश के इंदौर, रीवा एवं उज्जैन संभागों में भारी बारिश की चेतावनी

इस समय मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 33 महिलाएं हैं. इनमें से एक नॉमिनेटेड हैं. लेकिन इनमें से अधिकांश महिलाएं पॉलिटिकल फैमिली बैकग्राउंड से हैं. अगर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल जाता है तो उनकी संख्या बढ़ेगी. बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष लता इलकर का कहना है कि भारत में चुनाव असली मुद्दों पर नहीं लड़े जाते. वहीं लोगों में यह भी मानसिकता घर कर गई है कि महिलाएं पुरुषों से कमजोर होती है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन हकीकत है कि आप सिर्फ कड़ी मेहनत से चुनाव नहीं जीत सकते. यही कारण है कि महिलाओं को पार्टियां टिकट देने में पीछे हैं.