नई दिल्ली. बीते दिनों एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और केंद्र सरकार द्वारा इस कानून में किए गए संशोधन के विरोध में भारत-बंद का आह्वान किया गया था. बिहार और उत्तर प्रदेश समेत जिन अन्य राज्यों में इस बंद का व्यापक असर दिखा, उनमें मध्यप्रदेश भी शामिल था. मध्यप्रदेश में बंद के व्यापक असर को लेकर सत्ता विरोधी और समर्थन में कई बातें कही गईं. इसमें यह बात भी शामिल थी कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बंद समर्थकों को विपक्षी दल का समर्थन मिला. लेकिन बंद की व्यापकता ने राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के माथे पर बल जरूर पड़वा दिए हैं. पार्टी के अंदर इसको लेकर खलबली मच गई है. इसके मद्देनजर अब पार्टी के आलाकमान और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेताओं ने सोचना शुरू कर दिया है. खासकर सीएम शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा के बावजूद, भारत-बंद का यूं सफल होना, पार्टी के लिए चिंता की लकीरें जरूर खींच गया है. वहीं, संघ ने भी चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी को अलर्ट कर दिया है.

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बदलेगी रणनीति, क्राइसिस मैनेजमेंट शुरू
भारत-बंद के बाद बने सियासी हालात को देखते हुए भाजपा के राज्यस्तर के नेताओं ने क्राइसिस-कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है. यह कवायद आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए, चुनावी रणनीति में फेरबदल को लेकर हो रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक, पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई ने आनन-फानन में राज्य के पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों-सांसदों, राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत राज्य के नेताओं, जिला प्रमुखों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में संघ परिवार के आला नेता भी शामिल होंगे. यह बैठक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मध्यप्रदेश आगमन और चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत से पहले होगी. अमित शाह आगामी 12 सितंबर को उज्जैन से चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे. अखबार के अनुसार, इससे पहले भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें भारत-बंद के बाद बने हालात से उपजी चिंताओं पर चर्चा की जाएगी.

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मध्यप्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रभात झा को ही अमित शाह के कार्यक्रम आयोजन की जिम्मेदारी मिली हुई है. प्रभात झा, शाह के आने से पहले प्रदेश में बने नए सियासी हालात पर पार्टी नेताओं और अधिकारियों का मंतव्य जान लेना चाहते हैं. इसके लिए 12 सितंबर से पहले पार्टी में बैठकों के कई दौर चलेंगे. झा ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में कहा, ’12 सितंबर से पहले प्रदेश के दो स्थानों- 8 सितंबर को सागर और 9 को ग्वालियर में पार्टी की बैठक होगी. इस बैठक में राजनीतिक मामलों पर बात होगी, साथ ही अमित शाह के मध्यप्रदेश दौरे को लेकर भी चर्चा की जाएगी. वहीं 12 सितंबर से पहले उज्जैन में पार्टी के मंडल स्तरीय कार्यकर्ताओं की बैठक भी होगी.’

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सवर्ण वोटों को लेकर संघ ने चेताया
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भाजपा को प्रदेश में पार्टी के खिलाफ बन रहे माहौल के प्रति चेतावनी दी है. संघ ने पार्टी को चेताया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा के बाद पार्टी के पक्ष में जो माहौल बनने की बात की जा रही है, वह अगड़ी जातियों के विरोध के कारण ध्वस्त होता दिख रहा है. क्योंकि सवर्णों के भारत-बंद का कुछ भगवा संगठनों ने भी समर्थन किया था और बंद में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाई थी. यही वजह है कि पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के मध्यप्रदेश आगमन से पहले राज्यस्तर पर बैठक कर समस्याओं को सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ा लेना चाहती है. संघ से जुड़े एक नेता ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘भाजपा के नेताओं को अभी से सावधान होने की जरूरत है. क्योंकि ऐसे माहौल से भाजपा सरकार के विरोधियों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचेगा. यही नहीं, अगर पार्टी अभी सतर्क नहीं हुई, तो इसका खामियाजा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है.’ संघ के नेता का कहना था कि अगड़ी जातियों में पनप रहे गुस्से को शांत करने के लिए भाजपा को कुछ न कुछ करना होगा.

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