भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर सूचित किया कि सदन में शक्ति परीक्षण कराने के लिए राज्यपाल द्वारा उन्हें भेजे गए पत्र को निर्णय लेने के लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के पास भेज दिया है. Also Read - कांग्रेस ने सांसदों के वेतन में कटौती का स्वागत किया, सांसद निधि बहाल करने की मांग

बता दें कि राज्यपाल लालजी टंडन में सोमवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कमलनाथ सरकार को सदन में 17 मार्च मंगलवार को विश्वास मत हासिल करने के निर्देश दिए थे. इसके साथ ही राज्यपाल ने अपने पत्र में लिखा था कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो यह माना जाएगा कि उसके पास बहुमत नहीं है. Also Read - दीया जलाने के दौरान बीजेपी महिला जिला अध्यक्ष ने की थी फायरिंग, FIR दर्ज, अब मांग रहीं माफी

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को मंगलवार को लिखे पत्र में कहा है, सारे तथ्यों के प्रकाश में मैंने आपके निर्देश को समुचित निर्णय हेतु विधानसभा अध्यक्ष को अग्रेषित कर दिया है. मैं इस पत्र की भी एक प्रति उन्हें अंकित कर रहा हूं. Also Read - प्रधानमंत्री की दीये जलाने की अपील भाजपा का छुपा एजेंडा: एचडी कुमारस्वामी

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 16 मार्च को सदन में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था. विधानसभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति के राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए शक्ति परीक्षण कराए बिना 26 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दिया था.

राज्यपाल लालजी टंडन ने शनिवार की रात मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी सरकार अब अल्पमत में है, इसलिए वह सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद विधानसभा में विश्वासमत प्राप्त करें.

राज्यपाल ने यह पहला निर्देश दिया था कि विश्वास मत की प्रक्रिया मत विभाजन के माध्यम से होगी और विधानसभा इस सारी प्रक्रिया की स्वतंत्र व्यक्तियों के माध्यम से वीडियो रिकार्डिंग करायेगी. राज्यपाल ने अपने पत्र में कहा था कि यह काम हर हाल में 16 मार्च, 2020 को पूरा होना चाहिए.

इसके बावजूद, सोमवार को मप्र विधानसभा के अध्यक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन में शक्ति परीक्षण कराये बगैर ही विधानसभा की बैठक 26 मार्च तक के लिये स्थगित कर दी.

अध्यक्ष द्वारा छह विधायकों के त्यागपत्र स्वीकार किये जाने के बाद 222 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या घटकर 108 रह गयी है. इनमें वे 16 बागी विधायक भी शामिल हैं, जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन उन्हें अभी तक स्वीकार नहीं कर किया गया है. विधानसभा में भाजपा के 107 सदस्य हैं.