नई दिल्ली। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछना शुरू हो गया है. सत्ता में वापसी के लिए जोर लगा रही कांग्रेस ने नए साथी तलाशने शुरू कर दिए हैं. कांग्रेस ने आज कहा कि मध्य प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर उसका रुख ‘सकारात्मक’ है. पार्टी ने यह भी कहा कि बातचीत चल रही है और चुनाव से पहले तालमेल होने की उम्मीद है.Also Read - बसपा विधायक की अफसरों को सलाह, कहा- कोई मन से रिश्वत दे तो ले लें, क्योंकि...

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कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने कहा कि बसपा के साथ बातचीत चल रही है और गठबंधन करने को लेकर हमारा रुख सकारात्मक है. यह पूछने पर कि तालमेल के फैसले में इतना समय क्यों लग रहा है, बाबरिया ने कहा, चुनावी तालमेल के लिए बातचीत में समय लगता है. चुनाव में अभी समय है और उम्मीद है कि चुनाव से पहले हम साथ होंगे.

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बाबरिया का बयान इस मायने में अहम है कि कुछ दिनों पहले ही मध्य प्रदेश में बसपा के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी प्रदेश विधानसभा की सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.

बसपा का ठोस प्रदर्शन

दरअसल, कांग्रेस राज्य विधानसभा चुनाव में बसपा को साथ लेना चाहती है और इसकी वजह पिछले चुनाव में बसपा का प्रदर्शन है. 2013 के चुनाव में बसपा को चार सीटें मिलीं थी और उसके 6.30 फीसदी वोट हासिल हुए थे. कांग्रेस बसपा को साथ लेकर राज्य के दलित मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश में है.

एमपी में इसी साल चुनाव

मध्य प्रदेश में में इसी साल के अंत में चुनाव होने हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी-कांग्रेस के बीच है. बसपा तीसरी प्रमुख पार्टी है. बीजेपी लगातार 15 साल से सत्ता में कायम है. शिवराज सिंह रिकॉर्ड तीन बार सीएम बने हैं. इस बार उनकी साख दांव पर है और बीजेपी को फिर से सत्ता में लाने की चुनौती भी है. कांग्रेस ने कमान अनुभवी कमलनाथ और ज्योतिरादित्य को सौंपी है. कांग्रेस को उम्मीद है कि किसानों और एंटी इंकम्बेंसी के मुद्दों पर जनता उसका हाथ पकड़ सकती है.