
Digpal Singh
साल 2005-2006 में माखनलाल चतुर्वेदी युनिवर्सिटी से PGDM करने के बाद दो वर्ष तक कई अखबारों के लिए फ्रीलांसर के तौर पर काम किया. साल 2008 में लाइवहिंदुस्तान (HT Media) ... और पढ़ें
मध्य प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 17 नवंबर को मतदान सम्पन्न हुआ था. राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और चैलेंजर कांग्रेस ने प्रचार में खूब एड़ी-चोटी का जोर लगाया. BJP की तरफ से जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सहित कई केंद्रीय मंत्री प्रचार में उतरे, वहीं कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रचार का मोर्चा संभाला. कई अन्य केंद्रीय नेताओं ने भी मध्य प्रदेश में जमकर प्रचार किया. कल यानी 30 नवंबर 2023 को सामने आए ज्यादातर एग्जिट पोल के अनुसार राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार बन रही है.
अलग-अलग एग्जिट पोल में भाजपा (BJP) को 106 से 151 सीटों तक मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि कांग्रेस इस रेस में पिछड़ती दिख रही है. विभिन्न एग्जिट पोल में कांग्रेस को 70 से 121 सीटें मिलने का अनुमान है. ज्यादातर एग्जिट पोल में कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े से दूर दिखाया गया है. वहीं अन्य के खाते में भी 8 सीटें तक आने की भविष्यवाणी की गई है. असली तस्वीर रविवार 3 दिसंबर को सामने आएगी, जब पांचों राज्यों में मतगणना होगी. राज्य में भाजपा और कांग्रेस के अलावा, आम आदमी पार्टी (AAP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी (SP) भी मैदान में हैं. इस लेख में जानते हैं कि मध्य प्रदेश में इस बार विधानसभा चुनाव के प्रमुख मुद्दे क्या रहे –
साल 2018 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था, लेकिन कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी. मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने अन्य से समर्थन से सरकार चलाई, जो मार्च 2020 तक चली. इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और एक बार फिर भाजपा सत्ता में लौटी. शिवराज सिंह चौहान को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया. भाजपा इस बार पिछले लगभग 20 वर्षों यानी चार कार्यकाल के सत्ता विरोधी लहर का सामना किया. इन दो दशकों में सिर्फ 15 महीने के लिए ही कांग्रेस सत्ता में रही है. दूसरी तरफ कांग्रेस शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ जनता के गुस्से को भुनाकर सत्ता में वापसी की राह तलाशती नजर आई.
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के प्रचार में प्रमुख भूमिका निभाई. वह मध्य प्रदेश में भी भाजपा के लिए प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आए. पार्टी को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व से ही उम्मीद है. पार्टी ने उनकी छवि को भुनाने की भरपूर कोशिश की है.
कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा रहा. पार्टी ने राज्य सरकार के भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाया और इसी मुद्दे के साथ जनता को अपनी ओर करने की भरसक कोशिश की. कांग्रेस ने प्रचार किया कि जब भाजपा कर्नाटक में सत्ता में थी तो वहां भ्रष्टाचार चरम पर था और मध्य प्रदेश में तो यह उससे भी बुरा है. कांग्रेस ने शिवराज सिंह सरकार पर कई वित्तीय घोटालों का आरोप लगाया. पार्टी ने एक बार फिर व्यापम् के मुद्दे को उठाया.
छोटे महाराज यानी केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस बार मध्य प्रदेश में चुनावी मुद्दा थे. क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव के समय वह कांग्रेस में थे और उनके मुख्यमंत्री बनने की अटकलें भी थीं. लेकिन जब वह मुख्यमंत्री नहीं बने तो 2020 में कांग्रेस में हुई बगावत के सूत्रधार भी वही बने. अब देखना होगा कि राज्य की जनता ने अपने पुराने छोटे महाराज का साथ दिया है या नहीं. एक बार फिर अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगर भाजपा को जीत मिलती है और पार्टी शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री नहीं बनाती है तो ज्योतिरादित्य सिंधिया उस पद पर बैठ सकते हैं.
राज्य में बढ़ते अपराध भी एक मुद्दा रहे, विशेषतौर पर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों के खिलाफ. सिधि जिले में एक आदिवासी के सिर पर पेशाब करने के वायरल वीडियो ने राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया था. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी के पैर धोकर उनसे माफी मांगी थी. इसके अलावा राज्ये के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत भी मध्य प्रदेश में बड़े मुद्दों में शामिल रहा.
किसानों से जुड़े मुद्दे मध्य प्रदेश के चुनावों में हमेशा ही प्रमुख रहते हैं. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक-दूसरे पर किसानों और उनके मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाते रहे. फिर चाहे वह किसानों की लोन माफी हो या अच्छी गुणवत्ता के बीजों की उपलब्धता और खाद की उपलब्धता का मुद्दा हो.
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में हर बार की तरह इस बार भी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार भी मुद्दा रहे. AAP ने वादा किया कि अगर उनकी सरकार बनी तो बेरोजगारी भत्ता देगी, जबकि भाजपा स्किल डेवपलमेंट और बेरोजगारों को भत्ता देने की बात कही. शिक्षा और स्वास्थ्य भी अहम मुद्दे रहे. ग्रामीण इलाकों में स्कूल खुले लेकिन क्वालिफाइड टीचर्स की कमी मुद्दा रहे. टेम्परेरी टीचर्स को रेगुलराइज करने का मुद्दा भी राज्य में अहम रहा.
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