नई दिल्ली. मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के मैदान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सियासी संग्राम चरम पर है. दोनों दल जनता के सामने पूरे होने वाले और सपने जैसे लगने वाले, दोनों तरह के वादे कर रहे हैं. किस दल के किन-किन वादों पर जनता भरोसा करेगी, यह तो चुनाव का परिणाम ही बताएगा. लेकिन चुनावी माहौल में वादों का प्रभाव नजर आने लगा है. सियासी जानकार और मध्यप्रदेश के लोग इसे शिवराज की सरकार के लिए ‘जनता का संकेत’ कह रहे हैं. यह संकेत भाजपा और शिवराज के लिए दुरूह क्षेत्र बन रहे, कृषि समुदाय से आया है. दरअसल, मध्यप्रदेश में पिछले साल हुए किसान आंदोलन के बाद कांग्रेस पार्टी ने बढ़-चढ़कर किसानों के हित की बात करनी शुरू की थी. इसी क्रम में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश की सत्ता में आने के बाद किसानों की ऋण माफी से जुड़ा वादा भी किया है. ताजा समाचार यह है कि प्रदेश के किसानों के एक बड़े वर्ग ने राहुल गांधी के कृषि ऋण माफी के वादों पर अमल करना शुरू कर दिया है. पिछले कुछ महीनों में प्रदेश में किसानों द्वारा कर्ज के भुगतान में 10 फीसदी की कमी आई है. यानी पूरे राज्य में लगभग 10 फीसदी किसानों ने कांग्रेस के वादे के अनुरूप बैंकों का लोन चुकाना बंद कर दिया है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के किसानों से वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो किसानों के 2 लाख रुपए तक के लोन माफ कर दिए जाएंगे. राहुल गांधी अपने इस वादे को बार-बार याद भी कराते रहते हैं. मंदसौर में किसानों पर पुलिस फायरिंग की पहली वर्षी के मौके पर इसी साल 6 जून को पहली बार यह वादा करने के बाद वे आज की तारीख में चुनावी रैलियों और सभाओं में भी किसानों को कांग्रेस पार्टी के वादे की याद दिला देते हैं. जाहिर है मध्यप्रदेश का अन्नदाता राहुल की बातों पर अमल करने लगा है. राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा था कि अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो 10 दिनों के भीतर किसानों का लोन माफ कर दिया जाएगा. राहुल के इस वादे को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पार्टी के घोषणापत्र में भी जगह दी है.

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मध्यप्रदेश में पिछले डेढ़ दशकों से सत्ता से दूर कांग्रेस, इस बार के चुनाव में सत्ता पाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है. ऐसे में पहले से परेशान और शिवराज सरकार से गुस्साए किसानों को लुभाने के लिए पार्टी ने हर तरह के दांव-पेंच आजमाने का फैसला कर रखा है. यही वजह है कि किसानों ने पार्टी के वादे पर भरोसा करते हुए बैंक लोन के भुगतान से अपना हाथ पीछे खींचना शुरू कर दिया है. राष्ट्रीय बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार को बताया कि वजह तो अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह हकीकत है कि किसानों द्वारा ऋण चुकाने की प्रक्रिया में कमी आई है. डीजीएम स्तर के अधिकारी ने कहा कि चुनाव के समय पर कोई भी राजनीतिक दल समाज के इस वर्ग के साथ कठोरता के साथ पेश नहीं आ सकता. इसलिए हमें भी चुनाव समाप्त होने का इंतजार है.

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सरकारी अधिकारियों के उलट, किसान संगठनों के नेता इस स्थिति के समर्थन में हैं. भारतीय किसान संघ बागी गुट के नेता शिव कुमार शर्मा उर्फ कक्काजी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि भाजपा ने मध्यप्रदेश में किसानों की ऋण माफी की सिर्फ बातें की हैं. तीन बार आश्वासन दिया गया, लेकिन एक बार भी सरकार ने इस पर अमल नहीं किया. इसके उलट कांग्रेस ने यूपीए सरकार के समय 74 हजार करोड़ रुपए का लोन माफ किया. कांग्रेस पार्टी ने पंजाब में भी ऐसा ही काम कर के दिखाया. जाहिर है, मध्यप्रदेश में रहने वाले किसानों के बड़े वर्ग को लगता है कि यहां पर भी पार्टी अपने वादे पर अमल करेगी. भारतीय किसान संघ, भोपाल के पूर्व जिलाध्यक्ष मिश्रीलाल राजपूत भी किसानों द्वारा बैंक लोन का भुगतान न करने की बात से सहमति जताते हैं. उन्होंने अखबार को बताया कि लोन माफी की योजना से बैंकों का लोन चुकाने वाले ईमानदार किसानों को लाभ नहीं होता है. ऐसी योजनाएं सिर्फ लोन न चुकाने वाले किसानों को फायदा पहुंचाती हैं. इधर, एमपी किसान कांग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुर्जर ने कहा कि कुछ किसानों ने बैंकों का लोन चुकाना बंद कर दिया है. किसानों को राहुल गांधी की बातों पर भरोसा है. उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस अगर सत्ता में आएगी तो उनका कर्ज माफ हो जाएगा.