भोपाल: मध्यप्रदेश मे पराली को जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को रोकने की योजना पर काम किया जा रहा है. इसी के तहत राज्य में पराली से ईंधन बनाने की इकाईयां लगाए जाने का प्रस्ताव है. राज्य के कृषि मंत्री कमल पटेल ने बीते दिनों दिल्ली में केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात की और उनकी कई विषयों पर चर्चा भी हुई. पटेल का कहना है कि राज्य में पराली जलाने से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए पराली से ईंधन बनाने के यूनिट लगाए जाएंगे. Also Read - Ayodhya Ram Temple: राम मंदिर निर्माण के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एक लाख रुपये का दिया दान

ज्ञात हो कि फसल कटाई के बाद पराली को जलाने के लिए किसान खेतों में आग लगाते हैं जिससे बड़े पैमाने पर धुंआ होता है. इससे पर्यावरण को नुकसान होता है. इसे रोकने के लिए पराली से ईंधन बनाने पर जोर दिया जा रहा है. Also Read - Driving License Latest Update: अब चुटकियों में बन जाएगा ड्राइविंग लाइसेंस, बदल गए हैं नियम, जानिए

पटेल ने आगे बताया कि प्रदेश की 25 कृषि उपज मंडियों में पेट्रोल पंप खोलना तय हो गया है, जल्द ही मंडियों का आवश्यकता के अनुसार चयन कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. मंडियों में पेट्रोल पंप खुालने से किसानों को कई तरह की समस्याओं से बचाया जा सकेगा. Also Read - UPDATE NEWS: एमपी में शराब पीने से हुई मौतों का आंकड़ा 20 हुआ, सीएम ने तत्‍काल प्रभाव से कलेक्‍टर-एसपी को हटाया

कृषि मंत्री पटेल का कहना है कि राज्य में किसानों के कल्याण के लिए प्रभावी योजनाओं को अमल में लाया गया है जिससे उन्हें आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने में मदद मिलेगी.आपको बता दें कि मध्य भारत और उत्तर भारत में पराली एक बेहद गंभीर समस्या है. इसकी वजह  से हर दिन प्रदूषण में वृद्धि होती जा रही है.

भारत इन दिनों दो तरह की गंभीर मामलों से जूझ रहा है. एक तो कोरोना वायरस का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है ऊपर से प्रदूषण की वजह से कोरोना संक्रमण में तेजी से फैल रहा है. प्रदूषण के बढ़ने के प्रमुख कारणों में पराली भी सबसे प्रमुख है. पराली जलाने से धुए का गुबार हजारों किलोमीटर कर फैल जाता है जिससे लोगों को सांस लेने में काफी समस्या होती है.