नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य में सभी इंडस्ट्री के लिए 70 प्रतिशत नौकरियां स्थानीय लोगों को देने के नियम को अनिवार्य बना दिया है. उन इंडस्ट्री को भी इन नियमों का पालन करना होगा जिन्हें बीजेपी सरकार में जमीन या अन्य सुविधाएं मिली थीं. इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि नई इंडस्ट्री पॉलिसी को लागू कर दिया गया है. वे सभी इंडस्ट्री जिन्हें सरकार की ओर से इंनसेंटिव या अन्य सुविधाएं मिलती हैं उन्हें अपने यहां 70 प्रतिशत जॉब स्थानीय युवाओं को देना होगा.

कमलनाथ के ऑफिस ने भी ट्वीट किया, वचन पत्र के वादों पर अमल करते हुए हमने राज्य सरकार द्वारा पोषित सभी उद्योगों में 70 फीसदी रोजगार मध्यप्रदेश के स्थानीय लोगों के लिए अनिवार्य कर दिया. राज्य के लिए नई औद्योगिक नीति दिंसबर 2018 में आई थी. मुख्यमंत्री कमलनाथ 19 फरवरी को उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे. इसमें इनवेस्टमेंट और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की नीति पर चर्चा होगी.

बता दें कि मध्य प्रदेश की कमान संभालते ही कमलनाथ ने नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लाने का वादा किया था. दावोस विश्व आर्थिक फोरम में कमलनाथ ने हिस्सा लिया था, सीएम ने उद्योगपतियों से मुलाकात की थी और राज्य में बिजनेस फ्रैंडली माहौल देने का वादा किया था. मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव एसआर मोहंती का कहना है कि राज्य सरकार ‘मध्य प्रदेश समिट’ की प्लानिंग कर रही है. यह 18-20 अक्टूबर के मध्य हो सकता है. सरकार राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की मदद करेगी. नई पॉलिसी के अनुसार, बेरोजगार युवाओं को ट्रेनिंग कैंप और जॉब मेले में खुद को रजिस्टर्ड करना होगा. इसके बाद इन युवाओं को स्टाइपेंड दिया जाएगा.

बता दें कि गुजरात की बीजेपी सरकार भी इस तरह का नियम ला चुकी है. गुजरात में लगने वाली इंडस्ट्री को रोजगार के मामले में गुजरातियों को प्राथमिकता देनी होगी. उन्हें ये आश्वस्त करना होगा कि वे 80 प्रतिशत रोजगार राज्य के लोगों को देंगी. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इसकी घोषणा की थी.

80 प्रतिशत गुजरातियों को जॉब देने के अलावा राज्य सरकार ने कहा था कि इंडस्ट्री 25 प्रतिशत नियुक्ति उसी क्षेत्र से करें जहां इंडस्ट्री लग रही है. मार्च 1995 में पारित एक सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, पिछले 15 वर्षों से राज्य में रहने वाले लोगों को स्थानीय लोगों के रूप में परिभाषित किया गया है. हालांकि अब इसे घटाकर सात साल कर दिया गया है.