मुरैना: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव का मतदान 28 नवंबर को है. मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी ‘पंचायत’ में पहुंचने के लिए राजनैतिक दलों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. वहीं, मध्य प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है, जिससे देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) प्रेरित मानी जाती है. माना जाता है कि देश की संसद का डिजायन इसी से प्रेरित होकर बनाया गया था. संसद इसी मंदिर की शैली पर बनी हुई है. ये मंदिर संसद भवन से इतना मिलता जुलता है कि दूर से देखने पर संसद भवन ही मालूम होता है. इस मंदिर को बेहद रहस्यमयी माना जाता है. इसे प्राचीन की तंत्र-मंत्र विद्या का यूनिवर्सिटी भी कहा जाता है.

करीब 700 साल पहले बना था मंदिर
यह मंदिर चम्बल के मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के मेतावली गांव में है. यह 64 योगिनी मंदिर है. बताया जाता है कि इसका निर्माण 1300 ईसवी के आस-पास हुआ था. यह मंदिर वृत्तीय आधार पर निर्मित है. इसमें 64 कमरे हैं. बीच में एक खुला मंडप है. यह पूरी तरह से गोल है. और आने-जाने के लिए एक गेट की तरह रास्ता बना हुआ है. मंदिर चम्बल के घने जंगलों के बीच एक ऊंची पहाड़ी पर बना है.

इस रहस्यमयी किले में घूमने पहुंची बारात हो गई थी गायब, बौना चोर, खजाने और खूबसूरत रानी से भी जुड़ा है इतिहास

 

यह 64 योगिनी मंदिर 1300 ईसवी में बना बताया जाता है.

यह 64 योगिनी मंदिर 1300 ईसवी में बना बताया जाता है.

 

कई रहस्य समेटे हैं संसद भवन की तरह दिखने वाला मंदिर, तंत्र-मंत्र का था बड़ा केंद्र
चंबल की ऐतिहासिक इमारतों पर शोध करने वाले एक्टिविस्ट शाह आलम कहते हैं 1921 में बनना शुरू हुई देश की संसद का डिजायन यहीं से लिया गया, लेकिन इस बात को जाहिर नहीं किया गया. संसद बिलकुल इस मंदिर की तरह है. वह बताते हैं कि ये मंदिर कई रहस्य समेटे हुए हैं. यह लम्बे समय से वीरान पड़ा रहा. इस बीच तंत्र-मंत्र विद्या का बड़ा केंद्र रहा, इसके प्रमाण मिलते हैं. यह कहते हैं कि ये मंदिर तंत्र-मंत्र विद्या की यूनिवर्सिटी था. वह कहते हैं कि देश के अधिकतर लोगों को इस रहस्यमयी जगह और इसका भारतीय संसद से कनेक्शन पता ही नहीं है.

मध्य प्रदेश चुनाव: अपने-अपने पारिवारिक गढ़ों में घिरते दिख रहे हैं महारथी

सर एडविन लुटयंस और सर हरबर्ट बेकर ने डिजायन किया था संसद भवन
बता दें कि देश की संसद को अंग्रेज़ सर एडविन लुटयंस और सर हरबर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था. देश की संसद को 12 फरवरी, सन 1921 को इसके निर्माण की नीव रखी गयी. और जनवरी, 1927 को यह बनकर तैयार हो गयी. अधीन भारत के गवर्नर जनरल लार्ड इरविन ने इसका उदघाटन किया. कड़ी मशक्कत के बाद 6 सालों में संसद बनकर तैयार हुई थी.

मंदिर मुरैना के घने जंगलों के बीच है.

मंदिर मुरैना के घने जंगलों के बीच है.

मध्य प्रदेश चुनाव: जनता से पहले जीत की ‘गारंटी’ के लिए इस ‘राजा’ की चौखट पर मत्था टेक रहे नेता

कहीं और नहीं ऐसा मंदिर, संसद इसी मंदिर का रूप
आर्कियोलोजिस्ट डॉ. वसीम खान का कहना है कि यह मंदिर गुर्जर व कछप कालीन है. डॉ. वसीम कहते हैं कि ऐसा मंदिर दुनिया में किसी और जगह नहीं है. यहां ऐसे अवशेष मिले, जिससे प्रतीत होता है कि इसमें विष्णु भगवान की पूजा होती थी. वह बताते हैं कि ऐसा भी हो सकता है कि यह किसी अन्य शक्ति या देवी का मंदिर भी रहा हो. फ़िलहाल यह रहस्य ही है कि आखिर इस अद्भुद मंदिर का निर्माण किस लिए किया गया था. यह मंदिर पुरातत्व विभाग भोपाल द्वारा संरक्षित है. वसीम खान कहते हैं कि यह रहस्यमयी मंदिर बिलकुल वैसा ही है, जैसी संसद भवन है. संसद भवन गोलाकार है. यह मंदिर भी इसी तरह गोलाकार है. इसके बीच भी भवन है, ये भी गोलाकार है. ये संसद में हैं और इस मंदिर में भी. देखने से ही लगता है कि यह संसद का ही एक रूप है.

विधानसभा चुनावों पर विस्तृत कवरेज के लिए क्लिक करें