मंदसौर (मध्य प्रदेश): ’11 साल की उम्र में पिता ने शराब के लिए महज पांच हजार रुपए में बेचा. कुछ साल में तीन बेटियां हुईं. खरीददार ने घर से निकाला. मायके पहुंची तो पिता ने फिर बेचा. दूसरे खरीददार से दो बेटे हुए, दोनों ज़िंदा नहीं रहे. फिर इस खरीददार ने मारपीट कर घर से निकाल दिया. इसके बाद एक तीसरा व्यक्ति साथ ले गया. उससे बेटे का जन्म हुआ. फिर से गर्भवती होने पर व्यक्ति गर्भपात की बात कहने लगा. और मारपीट कर घर से निकाल दिया. दो महिलाओं ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया. बच्चे को जन्म दिया. ये दो महिलाएं ही उस महिला को फिर से बेचने की बात करने लगीं.’

11 से 28 साल की उम्र तक अत्याचार, फिर भी नहीं की शिकायत
अत्याचार की ये कहानी उस महिला की है, जो 11 से 28 साल की उम्र तक कई बार बेची गई. इस दौरान अलग-अलग पुरुषों के साथ कुछ-कुछ समय तक रही और कुल सात बच्चों को जन्म दिया. इनमें से तीन बेटियों सहित पांच बच्चे ज़िंदा हैं, लेकिन सिर्फ एक उसके पास है. अब तक जिनके साथ भी वह रही, किसी ने भी उसे पत्नी का दर्जा नहीं दिया. यानी किसी ने भी उसके साथ विधिवत शादी नहीं की. इतने समय तक अलग-अलग लोगों के साथ रहने पर भी महिला अविवाहित और बेघर है. इतना सब सहने के बाद उसने कभी भी पुलिस से शिकायत नहीं की. न ही कोई कानूनी मदद ली.

7 बच्चों में सिर्फ एक उसके पास, नहीं मिला पत्नी का दर्जा
समाचार पत्र दैनिक जागरण की खबर के अनुसार ये मामला मध्य प्रदेश के मंदसौर का है. महिला अब महिला एवं बाल विकास विभाग के वन स्टेप सेंटर में रह रही है. 28 साल की ये महिला बताती है तीन चार दिन पहले ही वह स्टेप सेंटर में लाई गई. महिला के मुताबिक वह मध्य प्रदेश की ही रहने वाली है. बताती है कि 11 साल की उम्र में शराबी पिता ने सिर्फ पांच हजार में उसे बेच दिया, तब से आज तक वह बिकती ही आ रही है. 11 की उम्र से 6 साल तक जिस शख्स के साथ रही उसका नाम नाहर सिंह था. 6 साल में उससे तीन बेटियां होने पर नाहर ने घर से निकाल दिया. इसके बाद पिता के घर पहुंची. तीन साल पिता के साथ रही. लगभग 21 की उम्र में एक बार देवास निवासी राकेश थापा नाम के शख्स को बेच दिया. कुछ साल में राकेश से दो बच्चे हुए, दोनों की मौत होने पर उसने घर से निकाल दिया. इसके बाद भटकने के दौरान उसे उसका ही रिश्तेदार साथ ले गया. एक बेटे के बाद दूसरी बार प्रेग्नेंट हुई तो गर्भपात को कहा गया. मना करने पर मारपीट कर घर से निकाल दिया.

जिन महिलाओं ने मदद की, उन्होंने ने भी की बेचने की बात
दो महिलाओं ने सहानुभूति दिखाते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराया. यहां कुछ ही दिन में उसने एक और बेटे को जन्म दिया. ये महिला का अब तक का सातवां बच्चा था. जिन दो महिलाओं ने उसे अस्पताल भर्ती कराया था, वही उसे फिर से बेचने की बात करने लगीं. इस पर किसी ने पुलिस को फोन कर दिया. पुलिस ने सम्बंधित विभाग को सूचित किया. सामाजिक कार्यकर्ता अनामिका जैन ने बताया कि स्टेप सेंटर पर महिला सिर्फ 10 दिन रह सकती है. इसके बाद वह खुद महिला को उसके गांव लेकर जाएगी. महिला को उसका हक दिलाने की कोशिश करेंगी. वह बताती हैं कि यह अत्याचारों का चरम है, इसके बाद भी महिला ने कभी कोई शिकायत नहीं की. महिलाएं भी उसके साथ अतयाचार करती रहीं. इतने पुरुष साथ रहे, इतने बच्चे हुए लेकिन फिर भी वह विधिवत किसी की पत्नी नहीं हो पाई.