नई दिल्ली. मध्यप्रदेश में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य में कई दशकों से भाजपा एवं कांग्रेस ही चुनावी दंगल में आमने-सामने आती रही हैं. लेकिन इस बार चुनावी मुकाबला दिलचस्प होने वाला है. क्योंकि बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी सहित कई क्षेत्रीय पार्टियां भी चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस के साथ ताल ठोक रही हैं. साल के अंतिम महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक तरफ जहां डेढ़ दशक से सत्ता से दूर कांग्रेस पार्टी पूरे जोर-शोर से तैयारियों में जुटी है. वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का मौजूदा नेतृत्व और पार्टी हाईकमान किसी भी तरीके से राज्य की सत्ता को गंवाना नहीं चाहता. ऐसे में कांग्रेस जहां प्रदेश में अपना पहले वाला रुतबा हासिल करने और भाजपा से सत्ता छीनने के लिए प्रयासरत है, वहीं भाजपा अपना गढ़ बचाए रखने की कोशिश में जुटी हुई है. लेकिन इन दोनों पार्टियों के गुत्थम-गुत्थे के बीच कई और दल भी हैं जो चुनावी मैदान में अपने होने का अहसास कराने वाले हैं. बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 230 में से 165 सीटें जीती थीं. वहीं कांग्रेस को 58 सीटें मिली थीं. दोनों दलों को मिले मतों का प्रतिशत क्रमश: 44.48 और 36.38 था. बसपा, सपा और जीजीपी को क्रमश 6.29, 1.25 और एक प्रतिशत मत हासिल हुए थे. Also Read - सुनवाई में 61 बार गैरमौजूद रहे हार्दिक पटेल नहीं जा सकेंगे गुजरात से बाहर, कोर्ट ने खारिज की अर्जी

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सभी दल जुटे हैं चुनाव की तैयारी में

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, कांग्रेस और भाजपा समेत सभी राजनीतिक दल चुनाव से महीनों पहले अपनी तैयारियां पूरी कर लेना चाहते हैं. कांग्रेस ने जहां अपने वरिष्ठ नेता कमलनाथ को प्रदेश का मुखिया बनाया है. वहीं भाजपा ने अपना प्रदेश अध्यक्ष बदलते हुए जबलपुर से लोकसभा सांसद और संगठन के महारथी राकेश सिंह को प्रदेश की कमान सौंपी है. इधर, दिल्ली में नाटकीय तरीके से सत्ता हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी पहली बार मध्यप्रदेश के चुनावी दंगल में उतरने जा रही है. पार्टी ने अन्य दलों के मुकाबले काफी पहले ही अपने उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी कर दी हैं. आप की मप्र इकाई के संयोजक आलोक अग्रवाल ने कहा, ‘आगे चरणबद्ध तरीके से आप के उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी.’ प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की 15 जुलाई को इंदौरा में आमसभा प्रस्तावित है.

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शरद यादव भी लगाएंगे दांव, सपाक्स भी दौड़ में

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अभियान चलाकर जनता दल यूनाइटेड के बागी गुट के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव भी एमपी के चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेंगे. शरद यादव के नेतृत्व वाले जदयू के बागी गुट ने प्रदेश में ‘महागठबंधन’ के गठन के प्रयास तेज कर दिए हैं. इसके तहत गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) और इससे अलग हुए गुट भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) जैसे दलों को एक साथ लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. उधर, प्रदेश सरकार की रोजगार, पदोन्नति और शिक्षा में आरक्षण की नीति के विरोध से पैदा हुए संगठन सपाक्स ‘सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी, कर्मचारी संस्था’ के संरक्षक और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हीरालाल त्रिवेदी भी विधानसभा चुनाव लड़ने वाले हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

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क्षेत्रीय दलों की दिलचस्पी पर अपने-अपने अनुमान

मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव में आप, बसपा और अन्य दलों की दिलचस्पी को भाजपा अपने लिए फायदा बता रही है. इन पार्टियों का चुनाव में कोई असर न होने का दावा करते हुए भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा, ‘मध्यप्रदेश में राजनीति सामान्यत: दो मुख्य दलों भाजपा और कांग्रेस के बीच रही है. अन्य दलों की मौजूदगी से भाजपा का फायदा ही होगा, क्योंकि यह विपक्षी दल कांग्रेस के मतों का विभाजन करेंगे.’ वहीं, चुनाव में क्षेत्रीय दलों की मौजूदगी को लेकर कांग्रेस के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा, ‘मध्यप्रदेश में दो धुव्रीय राजनीति रही है, इसलिए कांग्रेस बसपा और सपा जैसे समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन कर सकती है, ताकि वोटों, विशेषकर एसटी,एससी और पिछड़े वर्गो के वोटों का विभाजन रोका जा सके. इस बारे में निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाएगा.’ आप और सपाक्स की मौजूदगी पर चतुर्वेदी ने कहा कि ये दल चुनाव में कोई असर नहीं डाल पाएंगे.

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