MP Assembly Election Result: खरगोन जीतने वाली पार्टी की ही बनती रही है MP में सरकार, इस बार भी परंपरा कायम

MP Assembly Election Result: आजादी के बाद से मप्र में कुल 16 बार विधानसभा के चुनाव हुए हैं, जिसमें 15 बार जो पार्टी खरगोन में जीती है. सूबे में उसी की सरकार बनी है.

Published date india.com Published: December 4, 2023 4:16 PM IST
BJP Flag
BJP Flag

MP Assembly Election Result: मध्य प्रदेश के खरगोन की जनता सूबे का राजनीतिक मिजाज पहले ही भांप लेती है. इसीलिए यह कहा जाता है कि खरगोन का गढ़ जीतने वाली पार्टी ही सत्ता तक पहुंचने में कामयाब हो पाती है. पिछले 12 विधानसभा चुनावों में चली आ रही यह परंपरा इस बार भी कायम रही.

MP में BJP को मिलीं 163 सीटें

राज्य में भाजपा ने जहां 163 सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी सत्ता बरकरार रखी, वहीं कांग्रेस केवल 66 सीटों पर सिमट गई. खरगोन विधानसभा सीट पर भाजपा के बालकृष्ण पाटीदार ने कांग्रेस के रवि जोशी को 13,765 मतों से पराजित किया. पाटीदार को कुल 1,01,683 मत मिले वहीं जोशी को 87,918 मत मिले.

16 बार हुए चुनाव 15 बार कायम रही परंपरा

आजादी के बाद मध्य प्रदेश में अब तक कुल 16 विधानसभा चुनाव हुए हैं और इनमें से 15 बार राज्य में उसी दल की सरकार बनी है, जिसने खरगोन विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया. वर्ष 1972 से लेकर अब तक हुए पिछले सभी 12 चुनावों में यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा और इस बार भी खरगोन जीतने वाली पार्टी को ही सत्ता हाथ लगी.

2018 में कांग्रेस को मिली थी खरगोन में जीत

मध्य प्रदेश विधानसभा के पिछले चुनाव (2018) में कांग्रेस ने भाजपा के 15 वर्षों के शासन का अंत किया था और फिर से राज्य की सत्ता में लौटी थी. खरगोन की जनता ने प्रदेश का राजनीतिक मिजाज पहले ही भांप लिया था. उसने भाजपा उम्मीदवार को नकार दिया. कांग्रेस के रवि जोशी ने यहां से लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले बालकृष्ण पाटीदार को पटखनी दी.

इस चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस सरकार का नेतृत्व कमलनाथ के हाथों में आया. हालांकि, उनकी सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद कमलनाथ की सरकार गिर गई और भाजपा फिर सत्ता में लौटी. शिवराज सिंह चौहान चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने.

खरगोन के अलावा भी हैं 9 सीटें

खरगोन के अलावा राज्य की तीन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पिछले नौ विधानसभा चुनावों में क्षेत्र की जनता ने जिसे चुना, उसी दल की राज्य में सरकार बनी. इनमें बुरहानपुर जिले की नेपानगर सीट, मंडला जिले की निवास सीट और बड़वानी जिले की सेंधवा सीट शामिल है.

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

हालांकि इस बार के विधानसभा चुनाव में नेपानगर में सत्ता के साथ जाने का क्रम तो बना रहा लेकिन निवास और सेंधवा सीट में यह सिलसिला टूट गया.

नेपानगर में भाजपा की मंजू राजेंद्र दादू ने कांग्रेस की गेंदू बाई को 44,805 मतों से पराजित किया. निवास सीट पर भाजपा ने केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को मैदान में उतारा था लेकिन उन्हें कांग्रेस के चैन सिंह वरकड़े से हार का सामना करना पड़ा. सेंधवा में भाजपा नेता और पूर्व मंत्री अंतर सिंह आर्य को कांग्रेस के मोंटू सोलंकी ने पराजित किया.

वर्ष 1977 से लेकर 2018 तक हुए सभी चुनावों में खरगोन के साथ ही नेपानगर, निवास और सेंधवा सीट के परिणाम भी उसी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में गए, जिसने सत्ता हासिल की.

महज एक बार टूटी खरगोन की परंपरा

खरगोन विधानसभा चुनाव के अब तक के इतिहास में सिर्फ एक ही अवसर ऐसा आया, जब वहां की जनता ने जिस दल के उम्मीदवार को जिताया, राज्य में उसकी सरकार नहीं बनी. वर्ष 1951 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में ही यह सीट अस्तित्व में आ गई थी. उन दिनों मध्य प्रदेश, मध्य भारत का हिस्सा था. राज्यों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप 1956 में मध्य प्रदेश एक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया.

पहले और दूसरे विधानसभा चुनाव में खरगोन से कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की और राज्य में सरकार भी कांग्रेस की ही बनी. उन दिनों रवि शंकर शुक्ल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे.

साल 1962 का विधानसभा चुनाव ही ऐसा था, जब निमाड़ अंचल के खरगोन की जनता ने राज्य के मतदाताओं के सियासी मूड के अनुरूप मतदान नहीं किया.

1962 में जनसंघ प्रत्याशी को मिली जीत

इस चुनाव में खरगोन की जनता ने जन संघ के उम्मीदवार भालचंद्र बगडारे को चुनकर विधानसभा भेजा, लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी और भगवंत राव मंडलोई मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए. इससे पहले भी वह 31 दिनों तक इस पद पर रह चुके थे. मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल के निधन के बाद मंडलोई को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाया गया था.

साल 1967 और 1972 के विधानसभा चुनावों में कपास की खेती के लिए मशहूर खरगोन जिले की इस विधानसभा सीट (खरगोन) पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया और राज्य में कांग्रेस की ही सरकार बनी.

इसके बाद हुए सभी विधानसभा चुनावों में (2023 तक) भी यह सिलसिला बरकरार रहा कि जिस पार्टी के उम्मीदवार को खरगोन से जीत मिली, उसी पार्टी की सरकार राज्य में सत्ता में आई.

(With agency inputs)

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.