भोपाल: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद सरकार बनाने को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद बुधवार दोपहर पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई. विधायक दल का नेता चुने जाने के लिए हुई इस बैठक में पार्टी के पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई, लेकिन बैठक में राज्य के अगले सीएम को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया. जानकारी के मुताबिक राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, नवनिर्वाचित विधायकों ने यह फैसला पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया है.

इस बैठक में पार्टी हाईकमान ने एके एंटनी को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा था. बैठक पांच बजे से शुरू हुई थी. मुख्यमंत्री के लिए कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में से कोई एक नाम तय हो सकता है.

इससे पहले कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व अध्यक्ष सुरेश पचौरी, सांसद विवेक तन्खा, अरुण यादव का प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा. इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल आनंदी बेन से मुलाकात कर सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन होने का पत्र सौंपा.

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ज्ञात हो कि राज्य में 230 विधानसभा सीटें हैं और बहुमत के लिए 116 विधायकों की जरूरत है. कांग्रेस के खाते में 114 सीटें आई हैं. चार निर्दलीय, बसपा के दो और सपा के एक विधायक के समर्थन का कांग्रेस दावा कर रही है. इस तरह कांग्रेस 121 विधायक के समर्थन का का दावा कर रही है.

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कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि कांग्रेस बहुमत के साथ सरकार बना रही है. निर्दलीय, बसपा और सपा का साथ कांग्रेस को है, इसलिए पार्टी बहुमत वाली सरकार बनाने वाली है.