नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट मध्‍य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का निर्देश देने के लिये पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के लिए सोमवार को तैयार हो गया. संभावना इस बात की है कि सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को ही इस मामले में कोई निर्देश दे सकता है. Also Read - मध्यप्रदेश के गांव में ‘मुसलमान व्यापारियों का प्रवेश निषेध’ की तस्वीर हो रही है वायरल, जानें क्या है इसकी सच्चाई   

न्यायमूर्ति डॉ डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की दो-न्यायाधीश पीठ कल MadyaPradesh राज्य विधानसभा में तत्काल फ्लोर टेस्ट आयोजित करने के लिए भाजपा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगी. Also Read - मध्यप्रदेश में कोरोना से एक और व्यक्ति ने तोड़ा दम, राज्य में संक्रमितों की संख्या 155 हुई 

इस याचिका में कहा गया है कि राज्य विधानसभा के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और विधानसभा के प्रधान सचिव को इस न्यायालय के आदेश के 12 घंटे के भीतर विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने का निर्देश दिया जाए.

बता दें कि मध्‍य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 16 मार्च को सदन में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था. शीर्ष अदालत में सोमवार को संबंधित अधिकारी के समक्ष इस मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया है.

अधिवक्ता सौरभ मिश्रा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफा के बाद कमल नाथ सरकार विश्वास खो चुकी है. इन 22 विधायकों में से 6 के इस्तीफे अध्यक्ष पहले ही स्वीकार कर चुके हैं और अब मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में आ गई है. ऐसी स्थिति में कमल नाथ सरकार को एक दिन भी सत्ता में रहने का कोई कानूनी, नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री अपनी अल्पमत सरकार को बहुमत में तब्दील करने के लिए विधायकों को धमकी देने और प्रलोभन देने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं. खरीद फरोख्त के प्रयास चरम पर हैं. इसलिए जरूरी है कि राज्यपाल के निर्देशानुसार 16 मार्च को ही सदन मे शक्ति परीक्षण कराया जाए.

याचिका में कहा गया है कि शक्ति परीक्षण स्थगित करने से खरीद फरोख्त को बढ़ावा मिलेगा और यह राज्यपाल के निर्देशों और शीर्ष अदालत द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था का उल्लंघन होगा. शिवराज सिह चौहान के अलावा गोपाल भार्गव तथा नरोत्तम मिश्रा सहित भाजपा के 9 विधायक इस मामले में चार याचिकाकर्ता हैं. इस याचिका में राज्य विधानसभा के अध्यक्ष और कमल नाथ को पक्षकार बनाया गया है.

राज्यपाल लालजी टंडन ने शनिवार की रात मुख्यमंत्री कमल नाथ को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी सरकार अब अल्पमत में है, इसलिए वह सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद विधान सभा में विश्वास मत प्राप्त करें.

राज्यपाल ने यह निर्देश दिया था कि विश्वास मत की प्रक्रिया मत विभाजन के माध्यम से होगी और विधान सभा इस सारी प्रक्रिया की स्वतंत्र व्यक्तियों के माध्यम से वीडियो रिकॉर्डिंग कराएगी. राज्यपाल ने अपने पत्र में कहा था कि यह काम हर हाल में 16 मार्च, 2020 को पूरा होना चाहिए.

इसके बावजूद, सोमवार को मप्र विधानसभा के अध्यक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन मे शक्ति परीक्षण कराये बगैर ही विधानसभा की बैठक 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी. अध्यक्ष द्वारा छह विधायकों के त्यागपत्र स्वीकार किये जाने के बाद 222 सदस्यीय विधान सभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या घटकर 108 रह गयी है. इनमें वे 16 बागी विधायक भी शामिल हैं जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन उन्हें अभी तक स्वीकार नहीं कर किया गया है. विधानसभा में भाजपा के 107 सदस्य हैं.