नई दिल्ली: कांग्रेस ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को उम्मीदवारों की छठी और अंतिम सूची जारी कर दी. पार्टी की ओर से जारी इस सूची में सात नाम हैं जिनमें मानपुर, इंदौर-1 और रतलाम-ग्रामीण सीटों पर उम्मीदवार बदले गए हैं तो जतारा की सीट लोकतांत्रिक जनता दल को दी गई है. सबसे चौंकाने वाला नाम अरुण यादव का है जिन्‍हें बुधनी से मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मैदान में उतारा गया है. Also Read - मप्र चुनाव: वोटिंग के पहले कॉफी हाउस में 'बेफिक्र' शिवराज- जीत का आत्‍मविश्‍वास या टोटके का सहारा?

यह चौंकाने वाला इसलिए है क्‍योंकि अप्रैल, 2018 में यादव ने प्रदेश अध्‍यक्ष पद से हटाए जाने के बाद चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी. ऐसे में सवाल यह है कि उन्‍हें जबरदस्‍ती मुख्‍यमंत्री के खिलाफ उम्‍मीदवार बनाया गया है या फिर ये सीएम को कांग्रेस की ओर से वाक ओवर है.

अरुण यादव राज्‍य के पूर्व उप मुख्‍यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे सुभाष यादव के बड़े बेटे हैं. सुभाष यादव 1993 से 2008 तक कांग्रेस के टिकट पर कसरावद के विधायक रहे. अरुण यादव कभी विधानसभा के सदस्‍य नहीं रहे, लेकिन दो बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं और मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. वे 2014 में प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष बने थे. इस साल अप्रैल में जब उन्‍हें हटाकर कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस की कमान दी गई थी तो गुस्‍साए अरुण यादव ने घोषणा की थी कि वे विधानसभा या लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे.

पहला सवाल तो यही है कि यादव चुनाव लड़ने के लिए राजी कैसे हुए. फिर अपने गृह जिले खरगौन को छोड़कर सीहोर के बुधनी क्षेत्र से पार्टी के उममीदवार बनने को कैसे राजी हुए. वाक ओवर का संदेह इसलिए पैदा हो रहा है क्‍योंकि शिवराज सिंह चौहान के प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं की निकटता जगजाहिर है. इन नेताओं पर अक्‍सर प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से चौहान को मदद पहुंचाने के आरोप भी लगते रहे हैं.

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इससे पहले बृहस्पतिवार को दिन में कांग्रेस ने उम्मीदवारों की पांचवीं सूची जारी की थी जिसमें 16 नाम शामिल थे. पहले बताया गया था कि पांचवीं सूची के बाद केवल मानपुर सीट पर ही प्रत्‍याशी की घोषणा बाकी रह गई है. पार्टी ने छठी सूची जारी करने से भी इंकार किया था, लेकिन बृहस्‍पतिवार रात पार्टी ने कुछ सीटों पर प्रत्‍याशियों को बदले जाने की घोषणा की.

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पांचवीं सूची में घोषित 16 प्रत्‍याशियों में सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री सरताज सिंह का था जो कुछ घंटे पहले तक भाजपा में थे. भाजपा ने उन्‍हें उम्र के आधार पर टिकट नहीं देने का फैसला किया तो वे कांग्रेस में शामिल हो गए और होशंगाबाद से पार्टी के उम्‍मीदवार बन गए. राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों पर 28 नवंबर को मतदान है. 11 दिसंबर को नतीजे घोषित होंगे.