मध्य प्रदेश उपचुनाव: कांग्रेस की जीत से सिंधिया मजबूत, शिवराज को झटका

इस जीत से कांग्रेस का उत्साह बढेगा और वह और आक्रामक होकर बीजेपी का मुकाबला करेगी

Written by: Abdulkadir
Published: March 1, 2018, 11:14 AM IST

मध्य प्रदेश के दो विधानसभा सीटों कोलारस और मुंगावली में हुए उप-चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज करते हुए अपना कब्जा बरकरार रखा है. कोलारस में कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव और मुंगावली में बृजेंद्र सिंह यादव ने जीत दर्ज की है. अशोकनगर के मुंगावली में कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह यादव ने बीजेपी उम्मीदवार बाई साहब पर 2124 वोट के अंतर से जीत दर्ज की है. वहीं शिवपुरी के कोलारस में कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव ने बीजेपी के देवेंद्र जैन पर 8086 वोट से जीत दर्ज की है. इस तरह दोनों उप-चुनाव कांग्रेस की झोली में गए हैं.

इन दो सीटों को जीतकर कांग्रेस ने राज्य में 10 महीनो के भीतर लगातार 4 सीटों पर जीत दर्ज की है. करीब 15 साल से सूबे की सत्ता पर काबिज बीजेपी को बुधवार को आए दो विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनावों के परिणामों से बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत बीजेपी के सभी बड़े नेताओं की तमाम कोशिशों के बावजूद बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. इन चुनावों को इसी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के सेमी-फाइनल के तौर पर देखा जा रहा था.

क्या शिवराज सिंह चौहान की पकड़ कमजोर हो रही है

कोलारस और मुंगावली में हुए उप-चुनाव शिवराज सरकार बनाम कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हो गया था. मुख्यमंत्री ने इन क्षेत्रों में काफी आक्रामक प्रचार किया था और सूबे के कई मंत्रियों ने भी कांग्रेस को हारने के लिए काफी मेहनत की थी. बीजेपी ने चुनाव जीतने के अपने प्रयास में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी. मगर उनके हाथ मायूसी ही हाथ लगी. इन नतीजों ने यह साफ़ कर दिया है कि सूबे में अब बीजेपी के लिए पहले जैसा अनुकूल माहौल नहीं है. जनता का मुद बदल रहा है.

किसानों का गुस्सा

इस हार से एक बार फिर मध्यप्रदेश में कृषि संकट पर फोकस लौट गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को लुभाने के लिए कई वादे किए थे मगर वह काम नहीं आए. आपको याद दिला दें कि पिछले साल राज्य के मंदसौर जिले में किसानों ने आन्दोलन किया था जो बाद में हिंसक हो गया था. पुलिस गोलीबारी में पांच किसानों की मौत हो गई थी. किसानों में इस बात का गुस्सा था और उन्होंने वो वोटों के जरिए प्रकट किया. इन नतीजों से सरकार को यह इशारा जरूर मिला है कि आने वाला समय उनके लिए बहुत अच्छा नहीं है.

मुख्यमंत्री चौहान ने लगभग हर सभा और जनसंपर्क के दौरान दोनों जगहों के मतदाताओं से पांच माह के लिए भाजपा का विधायक मांगा और वादा पूरे न करने पर अगले चुनाव में नकार देने तक की बात कही, मगर जनता का उन्हें साथ नहीं मिला.

आरएसएस की चेतावनी को किया अनदेखा

किसानो के आन्दोलन के बाद आरएसएस ने सरकार को हालात से अवगत कराया था. आरएसएस सहयोगी, भारतीय किसान संघ (बीकेएस) और भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) दोनों ने सूबे में जमीन हालत से सरकार को अवगत कराया था. आरएसएस ने बताया था की सरकार और जनता के बीच दुरी बढ़ रही है जिसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है.

सिंधिया बने कांग्रेस के लिए उम्मीद की किरण

जैसे की हमने पहले बताया यह उप-चुनाव शिवराज सरकार बनाम कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हो गए थे. इसमें जीत सिंधिया को मिली. कांग्रेस की कमान युवा सांसद सिंधिया के हाथ में थी. कांग्रेस को सिंधिया रूप में नै उम्मीद की किरण नजर आ रही हैं. सिंधिया युवाओं को आकर्षित करने में कामयाब हो रहे हैं. लोकसभा में उनके भाषणों को भी पसंद किया जाता है.

आने वाले दिनों में सिंधिया विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी की रणनीति में अहम भुमिका निभा सकते है. ऐसा भी हो सकता है कि कांग्रेस पार्टी उन्हें शिवराज सिंह चौहान के सामने मुख्यमंत्री प्रत्याशी के रूप में पेश करें. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ इससे कितने सहमत होंगे यह वक्त बताएगा.

बहरहाल, इस जीत से कांग्रेस का उत्साह बढेगा और वह और आक्रामक होकर बीजेपी का मुकाबला करेगी. क्योंकि उसे इस जीत से वह खुराक भी मिल गई है, जिसकी उसे दरकार थी. अगर कांग्रेस किसानों को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब होती है तो शायद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो सकता है.

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