नई दिल्‍ली: कोरोना वायरस संक्रमण के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को अपने मंत्रिमंडल के पांच मंत्र‍ियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है. एक दिन पहले इन पांचों मंत्र‍ियों को शपथ दिलाकर कैबिनेट का गठन किया गया था. इन नए मंत्र‍ियों में नरोत्तम मिश्रा को गृह और स्वास्थ्य विभाग आवंटित किया गया है. Also Read - Covid-19 Cases in Bihar: प्रवासियों के लौटने के बाद तेजी से फैला संक्रमण, 206 नए मामले, कुल 3, 565 संक्रमित, जानें कहां कितनी संख्या

पिछड़ा वर्ग से आने वाले कमल पटेल को कृषि मंत्री बनाया गया है. जबकि विधायक रही मीना सिंह को आदिवासी कल्याण विभाग की जिम्‍मेदारी दी गई है. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए ज्‍योतिरादित्‍य समर्थक तुलसी सिलावट को जल संसाधन विभाग, गोविंद सिंह राजपूत को खाद्य प्रसंस्करण मंत्री की जिम्‍मेदारी दी गई है. Also Read - दिल्ली में कोरोना का नया रिकॉर्ड, 1 दिन में 1163 नए मामले सामने आए

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभागों के आवंटन के बाद कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक की. Also Read - Lockdown 5.0: मध्य प्रदेश में 15 जून तक बढ़ाया गया लॉकडाउन, 13 जून के बाद खोले जाएंगे स्कूल

बता दें कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शपथ लेने के 29 दिन बाद एक दिन पहले मंगलवार को पांच सदस्यीय मंत्रिपरिषद का गठन किया था. सीएम चौहान ने जिन पांच सदस्यों को अपनी कैबिनेट में शामिल किया है, उनमें तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, नरोत्तम मिश्रा, मीना सिंह एवं कमल पटेल हैं.

मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पांच सदस्यीय मंत्रिपरिषद का गठन करने के कुछ ही घंटों बाद कहा कि कोरोना वायरस से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए इन मंत्रियों को प्रदेश के संभागों का प्रभार दिया गया है.

सीएम ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने मंत्रियों को संभागों के प्रभार की जिम्मेदारी देते हुए कहा था, ‘नरोत्तम मिश्रा को भोपाल एंव उज्जैन संभाग, तुलसी सिलावट को इंदौर एवं सागर संभाग, कमल पटेल को जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग, गोविंद सिंह राजपूत को चंबल एवं ग्वालियर संभाग और मीना सिंह को रीवा एवं शहडोल संभाग का प्रभार सौंपा गया है. ‘ चौहान ने कहा, ‘मंत्रियों को विभाग भी शीघ्र आवंटित किये जाएंगे.’

बता दें शिवराज कैबिनेट में तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं. ये दोनों कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री थे और सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद उन 22 विधायकों में शामिल थे जो पिछले महीने कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे.

शिवराज सिंह चौहान ने सीएम की शपथ लेने के 29 दिन बाद मंगलवार को पांच सदस्यीय मंत्रिपरिषद का गठन किया था. बता दें कि सिंधिया समर्थक इन 22 विधायकों का विधानसभा की सदस्यतता से दिया गया इस्तीफा भी मंजूर हो गया था, जिसके बाद कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आ गई थी और उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से 20 मार्च को इस्तीफा दे दिया था.

इसके बाद 23 मार्च को चौहान के नेतृत्व में भाजपा नीत सरकार सत्ता में आई और 24 मार्च को उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया था.

पांच मंत्रियों में एक ब्राह्मण मिश्रा, एक क्षत्रिय राजपूत, एक अनुसूचित जाति सिलावट, एक अनुसूचित जनजाति एवं एक अन्य पिछड़ा वर्ग पटेल से हैं और इस प्रकार चौहान ने इस विस्तार में जातीय समीकरण को ध्यान में रखा है.

इसके अलावा, चौहान ने अपने मंत्रिपरिषद के गठन में क्षेत्रीय संतुलन बनाने का प्रयास भी किया, क्योंकि इस गठन में ग्वालियर- चंबल, बुंदेलखंड, मालवा, विध्य एवं मध्य प्रदेश के मध्य भाग के एक- एक नेता को जगह दी गई.