मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) के गोडसे (Godse) समर्थक बाबूलाल चैरसिया (Babulal Chaurasia) को कांग्रेस (Congress) में शामिल किए जाने के बाद पार्टी के भीतर संग्राम छिड़ गया है. पार्टी के इस फैसले के खिलाफ चैरसिया का खुले तौर पर कई नेता विरोध कर चुके हैं मगर चैरसिया अब भी सुरक्षित है और माना यह जा रहा है कि कमल नाथ (Kamal Nath) का गोडसे समर्थक को समर्थन हासिल है.Also Read - रेलवे के 91 हज़ार पद ख़त्म करने की रिपोर्ट पर राहुल गांधी ने कहा- मोदी सरकार को ये महंगा पड़ेगा

ग्वालियर (Gwalior) नगर निगम (Municipal Council) के हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) से पार्षद (Councilor) बाबूलाल चौरसिया को पिछले दिनों भोपाल (Bhopal) में आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने कांग्रेस (Congress) की सदस्यता दिलाई थी. चौरसिया को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई जाने के बाद कांग्रेस के कई नेता मुखर हुए थे. पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव (Arun Yadav) ने तो गांधी (Gandhi) हम शमिंर्दा हैं कहकर अपनी नाराजगी जताई थी. Also Read - वीर सावरकर की बात कांग्रेस ने मानी होती तो देश विभाजन की त्रासदी से बच गया होता: सीएम योगी

अरुण यादव (Arun Yadav) का बयान आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के भाई और विधायक (MLA) लक्ष्मण सिंह (Lakshman Singh), पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natrajan), पूर्व मंत्री सुभाष कुमार सोजतिया (Subhash Kumar Sojatia) ने चौरसिया को कांग्रेस (Congress) में लिए जाने को पार्टी की नीतियों के खिलाफ उठाया कदम बताया था. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) से जब चौरसिया को कांग्रेस में शामिल किए जाने का सवाल किया गया तो उन्होंने पूछा कि बाबूलाल चौरसिया कौन है. Also Read - राज्यसभा में कांग्रेस की राह आसान नहीं, सीनियर नेताओं की नाराजगी आ सकती है सामने; छत्तीसगढ़ सीएम सोनिया गांधी से करेंगे मुलाकात

एक तरफ जहां चौरसिया (Babulal Chaurasia) को कांग्रेस की सदस्यता दिलाए जाने पर कई नेता गांधीवादी विचारधारा (Gandhian Ideology) के खिलाफ बता रहे थे तो वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल (Manak Agarwal) ने सीधे तौर पर कमलनाथ पर हमला किया था. मानक अग्रवाल का मामला अनुशासन समिति (Disciplinary Committee) में गया और उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद भी अग्रवाल के उग्र तेवरों में बदलाव नहीं आया है.

अग्रवाल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (All India Congress Committee) के सदस्य हैं और उन्होंने सवाल किया है कि क्या प्रदेष की अनुशासन समिति (Disciplinary Committee) को उन पर कार्रवाई का अधिकार है. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है कि मानक अग्रवाल ने कमलनाथ के खिलाफ बयान दिया था, यह बात सही है. और उन पर पार्टी को कार्रवाई करने का अधिकार है. मगर अग्रवाल की निष्ठा हमेशा पार्टी में रही है इसलिए इस तरह की कार्यवाही से पहले विचार किया जाना चाहिए था.

वहीं दूसरी ओर गोडसे समर्थक को पार्टी में लेना कहां तक उचित है, इसका भी जवाब पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ (Kamal Nath) को देना चाहिए. सवाल उठ रहा है कि क्या कमल नाथ गोडसे समर्थक को संरक्षण दे रहे हैं.गोडसे (Godse) समर्थक को कांग्रेस में शामिल किए जाने के बाद से पार्टी में दो धाराएं साफ नजर आ रही हैं. एक तरफ वे लोग हैं जो कमलनाथ के साथ हैं तो दूसरी तरफ गेाडसे समर्थक को पार्टी में लिए जाने के खिलाफ खड़े हुए लोग हैं. कुल मिलाकर कांग्रेस ऐसे दोराहे पर खड़ी है जहां पार्टी में आने वाले समय में बिखराव और बढ़ने की संभावना है.

राजनीति के जानकारों का कहना है की कमलनाथ (Kamal Nath) ने मानक अग्रवाल (Manak agarwal) के खिलाफ कार्रवाई कर यह संदेश दिया है कि कांग्रेस में दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) समर्थकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. साथ ही कमल नाथ ने अपनी ताकत का भी लोहा मनवाने की कोशिश की है, अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई करके. हो सकता है कि आने वाले दिनों में कुछ और कांग्रेस कार्यकर्ताओं (Congress Worker) और उन नेताओं पर कार्रवाई हो जिन्होंने चौरसिया के कांग्रेस प्रवेश पर सवाल उठाए थे.

मानक अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने को सियासी तौर पर कमल नाथ (Kamal Nath) और दिग्विजय सिंह के बीच बढ़ती दूरी का भी संकेत देने वाले है. ऐसा इसलिए क्योंकि अग्रवाल की गिनती दिग्विजय समर्थकों में रही है. दिग्विजय सिंह जब भोपाल लोकसभा (Bhopal Loksabha) से चुनाव लड़े थे तब मानक अग्रवाल चुनाव के मीडिया प्रभारी थे. कुल मिलाकर यह माना जा रहा है कि कमल नाथ की यह कार्रवाई पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सामने लाने वाली है. साथ ही यह भी बताती है कि कमल नाथ और दिग्विजय सिंह के बीच सब-कुछ ठीक-ठाक नहीं है.