इंदौर: स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले पांच दिनों में कराए गए रैपिड एंटीजन टेस्ट में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के 52 कर्मचारियों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. इनमें से सर्वाधिक 35 कर्मचारी शुक्रवार को महामारी की जद में आए. Also Read - Uttar Pradesh News: बस्ती जेल में 123 कैदी और तीन कर्मचारी कोविड-19 से संक्रमित

बता दें कि करीब 35 लाख की जनसंख्‍या वाले इंदौर जिले में 24 मार्च 26 नवंबर तक कोरोना के कुल 40,522 मरीज मिल चुके हैं, जिनमें से 749 की मौत हो चुकी है. Also Read - Lockdown in India: 'लॉकडाउन में भारतीय अरबपतियों की संपत्ति में हुई 35 फीसदी की बढ़ोतरी, दुनिया भर में हर घंटे 1.7 लाख हुए बेरोजगार'

कोविड-19 की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित स्क्रीनिंग टीम के प्रभारी अनिल डोंगरे ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया, “उच्च न्यायालय परिसर में कराए गए रैपिड एंटीजन टेस्ट में सोमवार को पांच, मंगलवार को तीन, बुधवार को नौ और शुक्रवार को 35 कर्मचारी संक्रमित पाए गए.” डोंगरे ने स्पष्ट किया कि इन संक्रमितों में उच्च न्यायालय के कोई भी
न्यायाधीश शामिल नहीं हैं. Also Read - India vs England: चेन्नई टेस्ट से पहले इंग्लैंड टीम को अभ्यास के लिए मिलेंगे केवल तीन दिन

इस बीच, हाईकोर्ट अभिभाषक संघ के उपाध्यक्ष अमर सिंह राठौर ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिए अदालत परिसर में अगले सात दिनों के लिए न्यायिक काम-काज स्थगित किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया, “हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में हालांकि, अधिकांश मुकदमों की सुनवाई लंबे समय से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हो रही है, जिनमें न्यायाधीश और वकील अपने घरों या दफ्तरों से शामिल हो रहे हैं. लेकिन हाईकोर्ट परिसर में वकीलों की सुविधा के लिए अलग से वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष भी बनाए गए हैं जहां से वे सुनवाई के दौरान पैरवी कर रहे हैं.”

राठौर ने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग को उन सभी वकीलों की भी कोविड-19 की जांच करानी चाहिए, जो अपनी पेशेवर जरूरतों के चलते पिछले दिनों उच्च न्यायालय परिसर गए थे.

बता दें इंदौर, राज्य में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक करीब 35 लाख कीआबादी वाले जिले में 24 मार्च से लेकर 26 नवंबर तक महामारी के कुल 40,522 मरीज मिले हैं. इनमें से 749 मरीजों की मौत हो चुकी है.