इंदौर: मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सियासी सरगर्मियां लगातार जोर पकड़ रही हैं. इस बीच, दर्शकों के त्योहारी उत्साह के बावजूद सूबे के करीब 400 छोटे-बड़े सिनेमाघरों में पखवाड़े भर से नई फिल्में रिलीज नहीं हो पा रही हैं. शहरी स्थानीय निकायों द्वारा सिनेमा टिकटों पर मनोरंजन कर लगाने के फरमान के खिलाफ लामबंद फिल्म उद्योग की हड़ताल के कारण यह स्थिति बनी है.

एक देश, एक कर
सिनेमा उद्योग के अग्रणी संगठन फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने रविवार को बताया, “सिनेमा टिकटों पर 28 प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पहले ही लग रहा है. अब राज्य के शहरी स्थानीय निकायों ने अलग-अलग श्रेणियों के हरेक टिकट पर पांच से 15 प्रतिशत तक की दर से मनोरंजन कर भी लगा दिया है. इस दोहरे करारोपण के विरोध में राज्य के सिनेमाघरों में पांच अक्टूबर से नई फिल्मों का प्रदर्शन बंद है.”

भाजपा व एमआईएम दोनों ही ‘नफरत की विचारधारा’ को साझा करती हैं: राहुल गांधी

उन्होंने कहा, “देश में जीएसटी पेश करते वक्त “एक देश, एक कर” का नारा बड़े जोर-शोर से दिया गया था. लेकिन स्थानीय निकायों द्वारा सिनेमा टिकटों पर मनोरंजन कर लगाने से यह नारा फिल्म उद्योग के मामले में झूठा साबित होता दिखाई दे रहा है.” जैन के मुताबिक, राज्य में जारी हड़ताल से सिनेमा उद्योग को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है और सैकड़ों टॉकीज कर्मचारियों की आजीविका खतरे में है.

फिलहाल फैसला नहीं
उन्होंने कहा, “हम मनोरंजन कर का अतिरिक्त बोझ उठाने की स्थिति में नहीं हैं. हमारी मांग है कि यह कर फौरन वापस लिया जाना चाहिए. इस मामले में केंद्र सरकार को दखल देना चाहिए.” इस बीच, जानकारों ने बताया कि चूंकि प्रदेश में विधानसभा चुनावों की आदर्श आचार संहिता लागू है. इसलिये सिनेमा उद्योग की मांगों पर राज्य सरकार फिलहाल कोई आधिकारिक फैसला नहीं कर पा रही है. राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों पर मतदान 28 नवंबर को होना है, जबकि वोटों की गिनती 11 दिसंबर को होगी. ऐसे में जाहिर है कि नई राज्य सरकार के गठन के बाद इसके औपचारिक रूप से हरकत में आने में करीब दो महीने बाकी हैं. (इनपुट एजेंसी)