उज्जैन (मध्यप्रदेश). उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि दो दिन पहले मंदिर में दर्शन करने आईं माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली दुनिया की पहली दिव्यांग अरूणिमा सिन्हा को भस्मारती के दौरान मंदिर के गर्भगृह में जाने से इसलिए मना किया गया, क्योंकि वह साड़ी पहने हुई नहीं थीं. भस्मारती में प्रवेश हेतु गणवेश का नियम बनाया गया है, जिसके तहत महिलाओं को साड़ी पहनकर और पुरूषों को धोती पहनकर आना जरूरी है, तभी गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति मिलेगी.

राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी अरूणिमा ने उज्जैन महाकाल मंदिर में अव्यवस्थओं का आरोप लगाते हुए कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ट्विटर पर लिखा था, मुझे एवरेस्ट पर चढ़ने में इतनी दिक्कत नहीं आई, जितना महाकाल मंदिर के दर्शन करने में आई. इसके साथ-साथ उन्होंने कहा था कि इस मंदिर के सुरक्षा कर्मचारियों एवं मंदिर प्रशासन ने मेरी दिव्यंगता का मज़ाक बनाया.

महाकाल मंदिर प्रशासक अवधेश शर्मा ने पीटीआई-भाषा को यहां बताया, महाकाल मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. इसमें प्रतिदिन तड़के की जाने वाली परंपारिक ‘भस्मारती’ में प्रवेश करने वाले भक्तों के लिए गणवेश पहनने का नियम बना हुआ है. इसके तहत महिलाओं को साड़ी पहनकर और पुरूषों को धोती पहनकर आना जरूरी है. इस गणवेश को मंदिर की भाषा में शोला कहते हैं. इस शोला को पहनकर ही भक्तों को तड़के होने वाली भस्मारती में प्रवेश की अनुमति है.

उन्होंने कहा, अरूणिमा रविवार को प्रात साढ़े चार बजे मंदिर में आई. वह भस्मारती में प्रवेश मिलने वाली गणवेश में नहीं थीं. मंदिर के पुजारियों एवं वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उसे भस्मारती के दौरान प्रवेश पाने के नियम के बारे में बताते हुए कहा कि महिलाओं को केवल साड़ी पहनकर ही गर्भगृह में जाने की अनुमति है. उसे नंदी गृह तक जाने दिया गया. शर्मा ने बताया कि गर्भगृह में जाने के लिए भस्मारती के समय ही यह ड्रेस कोड है. बाकी समय मंदिर के गर्भगृह में लोगों को हर तरह के कपड़े पहनकर जाने दिया जाता है.

उन्होंने कहा कि भस्मारती में प्रवेश पाने के लिए भक्तों को पहले से ही अपनी बुकिंग करवानी पड़ती है, तभी भस्मारती में शामिल होने की अनुमति मिलती है, लेकिन अरूणिमा ने भस्मारती में अपने शामिल होने के बारे में भस्मारती शुरू होने से कुछ समय पहले ही जानकारी दी थी. शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर ने एक सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया है, जिसमें सुरक्षाकर्मी मंदिर में अरूणिमा से बातें करते नजर आ रहे हैं.

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मंदिर प्रशासन की ओर दी गई सफाई एवं सीसीटीवी फुटेज पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अरूणिमा ने मीडिया से कहा, मेरे मोबाइल पर भी यह सीसीटीवी फुटेज आया है. इसमें एक लड़का जींस पहनकर मंदिर के गर्भगृह की ओर जा रहा है. जब वह जींस पहनकर जा सकता है, तो मैं लोवर पहनकर क्यों नहीं जा सकती हूं? मैं भी तो शिव भक्त ही हूं. अरूणिमा ने सवाल किया, क्या मैं दिव्यांग और महिला हूं, इसलिए मुझे गर्भगृह में नहीं जाने दिया गया. उन्होंने कहा, यदि गर्भगृह में जींस या लोवर पहनकर नहीं जा सकते, तो यह बहुत ही गलत परंपरा है.

हालांकि, मध्यप्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस द्वारा इस घटना के लिए माफी मांगे जाने पर अरूणिमा ने बताया, कभी भी मेरा ऐसा मकसद नहीं रहा कि इस घटना के लिए कोई मुझसे माफी मांगे. इसी बीच चिटनिस ने अरुणिमा के साथ महाकाल मंदिर उज्जैन में हुए दुर्व्यवहार की घटना के लिए माफी मांगते हुए कहा, इस संबंध में संभागायुक्त उज्जैन को दो दिन में जाँच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं. उन्होंने मंदिर में तत्काल ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कर अवगत कराने के निर्देश दिये हैं, जिससे किसी भी महिला के साथ ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो.

चिटनिस ने कहा, मैं स्वयं दिव्यांग व्यक्तियों से व्यवहार के विषय पर महाकाल मंदिर की व्यवस्था में लगे सभी कर्मचारियों तथा पंडित एवं पुजारियों से मिलकर बातचीत करूंगी. उन्होंने कहा, मैं अरुणिमा सिन्हा से मिलने शीघ्र ही लखनऊ जाऊंगी और उन्हें फिर मध्य प्रदेश आने का निमंत्रण दूंगी. वह देश की ऐसी बेटी हैं जिस पर हम सबको गर्व है.

गौरतलब है कि 24 दिसंबर की तड़के साढ़े तीन से चार बजे के बीच अरूणिमा अपनी दो सहयोगी महिलाओं के साथ महाकाल मंदिर में होने वाली भस्मारती में शामिल होने आई थीं. मंदिर के सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों ने उसे उसकी दो सहयोगी महिलाओं के साथ गर्भगृह में जाने से दो बार रोका. जिसके कारण उसकी उनसे लंबे समय तक बहस हुई. हालांकि, अरूणिमा ने बाद में मंदिर के दर्शन किये. इस घटना के बाद वह महाकाल के दर्शन करने के बाद रो पड़ी थीं.