भोपाल : केन्द्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलने के बाद भोपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान खुलने का रास्ता साफ़ हो गया है. इस बाबत केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने जानकारी देते हुए कहा कि जल्द ही भोपाल में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान खुलेगा. थावरचंद गहलोत ने बताया कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को हुई बैठक में भोपाल में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान की स्थापना की स्वीकृति दे दी है.उन्होंने कहा यह ऐतिहासिक निर्णय है. देश में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी किस्म का पहला संस्थान होगा और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा. Also Read - इंदौर में कोरोनावायरस : रेड जोन इंदौर में संक्रमितों की संख्या 3,000 के पार, अब तक 114 मरीजों की मौत

उन्होंने कहा कि करीब 180 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह संस्थान निशक्तजन सशक्तीकरण विभाग के अंतर्गत एक सोसाइटी के रूप में सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत स्थापित किया जाएगा. गहलोत ने बताया कि इस संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी रोगों से जूझ रहे व्यक्तियों का स्वास्थ्य पुनर्वास, उनकी क्षमताओं का विकास करना, मानसिक स्वास्थ पुनर्वास के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना और मानसिक स्वास्थ पुनर्वास के लिए नीति बनाना है. Also Read - कोरोना काल वाली शादी: दुल्हन का कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव, दूल्हा पड़ा मुश्किल में, 35 बाराती क्वारंटाइन

इस संस्थान में एक निदेशक सहित 231 विभिन्न पद स्वीकृत किये गये हैं. गहलोत ने बताया कि संस्थान में नौ विभाग और केंद्र होंगे, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संबंधी विभिन्न प्रकार के 12 डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, स्नातक, स्नातकोत्तर और एम.फिल पाठ्यक्रम भी संचालित होंगे. पांच वर्षो के अंदर इस संस्थान में करीब 400 विद्यार्थियों के प्रवेश की व्यवस्था होगी. उन्होंने कहा कि यह संस्थान तीन वर्षों में दो चरणों में स्थापित होगा. दो वर्षों में संस्थान का निर्माण और विद्युत कार्य पूरा होगा. Also Read - Coronavirus in Indore : संक्रमितों की संख्या 2,100 के पार, मृतकों की संख्या पहुंची सौ के करीब

शुरुआत में यह संस्थान किराए के भवन में पाठ्यक्रम और ओपीडी सेवाएं चलाएगा. उसके बाद संस्थान से मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास हेतु संपूर्ण पुनर्वास सेवाएं और स्नातकोत्तर तथा एम फिल तक के पाठ्यक्रम शुरू हो जाएंगे. मध्यप्रदेश सरकार ने इस संस्थान के निर्माण के लिए भोपाल में पांच एकड़ जमीन दी है. संस्थान के विस्तार को ध्यान में रखते हुए 20-25 एकड़ अतिरिक्त भूमि आरक्षित करने की स्वीकृति दे दी है.
( इनपुट एजेंसी )