चेन्‍नई/ विलुपुरम: राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा (नीट) को उत्तीर्ण करने में असफल रही एक 18 साल की लड़की ने गुरूवार को अपने घर में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. इस घटना के साथ राज्य में नीट परीक्षा में असफल रहने पर अब तक आत्महत्या करने वाले मामलों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है. इसके बाद तमिलनाडु के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गुरुवार को प्रवेश परीक्षा को रद्द करने की अपनी मांग दोहराई है. Also Read - Cyclone Tauktae Update News: 5 राज्‍यों में खतरा, NDRF 53 टीमें कर रहा तैनात

राजनीतिक नेताओं ने कहा कि नीट का प्रश्नपत्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम पर आधारित है, जो राज्य बोर्ड के छात्रों के लिए कठिन माना जाता है. उनके अनुसार, केवल वे छात्र जो निजी कोचिंग कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं, वे परीक्षाओं को पास करने में सक्षम रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब छात्र नीट परीक्षा पास नहीं कर सके. Also Read - COVID-19: महामारी में राहत की जगह बने धर्मस्‍थल, मस्जिद में बना क्‍वारंटीन सेंटर

बता दें कि नीट से पहले, तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश स्कूल बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों पर
आधारित होता था. Also Read - Liquor Shops Closing: दो सप्ताह के लिए बंद हो रहीं शराब की दुकानें, एक्सपर्ट बोले- शराबियों से सैनिटाइजर छिपाकर रखें

इस परीक्षा का परिणाम बुधवार को घोषित किया गया था, एम मोनिशा दूसरे साल लगातार इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने में विफल
रही थी. जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया, वह बीते साल अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो सकी थी और इस साल संपन्न
नीट परीक्षा में उसके बहुत कम अंक आये थे. यह छात्रा इरोड जिले के त्रिचेनगोडा के प्रतिष्ठित विद्यालय से कक्षा 12 की छात्रा रही
थी.
मछुआरा समुदाय से संबंध रखने वाली इस लड़की की मां की हाल ही में मौत हो गई थी. पांच जून को तिरूपुर की एस रितुश्री और
पुद्दुकोट्ई की रहने वाली एन वैशिया ने नीट परीक्षा में असफल रहने के बाद आत्महत्या कर ली थी. हालांकि उन्होंने पहले अपनी बोर्ड
परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए थे.

पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास ने एक बयान जारी कर कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि ‘नीट’ चिकित्सा अध्ययन के गांव के
युवाओं के सपनों को नष्ट कर रहा है. केंद्र सरकार को चाहिए कि वह राज्य को नीट से मुक्त करने के लिए तमिलनाडु विधानसभा
द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति दिलाए.

डीएमके अध्यक्ष एम.के स्टालिन ने कहा कि एक संघीय सेट-अप में केंद्र सरकार को राज्यों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.
स्टालिन ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी.