इंदौर (मध्यप्रदेश): पश्चिम बंगाल के बर्दवान में वर्ष 2014 में हुए बम धमाके के मामले में वांछित आरोपी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने यहां से गिरफ्तार किया है. वह आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) का कथित सदस्य है और उस पर भारत और बांग्लादेश की लोकतान्त्रिक सरकारों के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आतंकी हमलों की साजिश रचने में सीधी भूमिका निभाने का आरोप है.

अधिकारियों के मुताबिक बर्दवान बम धमाका प्रकरण की एनआईए जांच के दौरान जेएमबी की इन आतंकी गतिविधियों का खुलासा हुआ था. मध्यप्रदेश पुलिस के एक आला अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पांच साल पहले पश्चिम बंगाल के बर्दवान में हुए बम धमाके के मामले में गिरफ्तार किये गये इस आरोपी की पहचान जहीरूल शेख उर्फ जहीरूल एसके (31) के रूप में हुई है. वह इस मामले में नामजद आरोपी है और एनआईए को उसकी लम्बे समय से तलाश थी. उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के बाद शेख को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया. एनआईए का दल ट्रांजिट वॉरंट के आधार उसे कोलकता की विशेष एनआईए अदालत में पेश करने के लिये अपने साथ ले गया.

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पश्चिम बंगाल के नादिया जिले का रहने वाला है आतंकी
अधिकारी ने बताया कि जहीरूल मूलत: पश्चिम बंगाल के नादिया जिले का रहने वाला है. वह पिछले कुछ समय से इंदौर की कोहिनूर कॉलोनी में किराये के मकान में रह रहा था और मध्यप्रदेश की इस आर्थिक राजधानी में राजमिस्त्री का काम कर रहा था. बर्दवान के खागरागढ़ इलाके के एक घर में दो अक्टूबर 2014 को धमाका होने से दो लोगों की मौत हो गयी, जबकि एक अन्य घायल हो गया था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि जहीरूल बर्दवान जिले के सिमुलिया के उस मदरसे में ड्राइवर के रूप में काम कर चुका है जो बम धमाका स्थल से करीब 50 किलोमीटर दूर है. इस मदरसे की गतिविधियां बम धमाके के बाद जांच के घेरे में आयी थीं.

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भारत और बांग्लादेश में बम धमाके की थी प्लानिंग
एनआईए के मुताबिक धमाके के वक्त घर में मौजूद व्यक्तियों के बारे में जांच में खुलासा हुआ था कि वे कथित तौर पर जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से जुड़े थे और बमों, हथियारों तथा असलहे के निर्माण में संलिप्त थे. आरोप है कि ये लोग भारत और बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी हमलों की बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिये गुप्त स्थानों पर रह रहे थे और आतंकी प्रशिक्षण शिविर चला रहे थे. जेएमबी पर बांग्लादेश सरकार ने वर्ष 2005 में प्रतिबंध लगा दिया था.