जयपुर: ऐसा लगता है एससी/एसटी एक्ट पर हुए हंगामे ने राजस्थान विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार में अहम भूमिका निभाई है. नतीजों के विश्लेषण से पता चला है कि भाजपा को इन चुनावों में आरक्षित कैटेगरी की 29 सीटों का नुकसान हुआ है. पिछले चुनाव में 50 सीटों के मुकाबले इस बार पार्टी को केवल 21 सीटों से संतोष करना पड़ा. भाजपा के इस नुकसान का फायदा सबसे ज्यादा कांग्रेस को हुआ. पार्टी को आरक्षित कैटेगरी की मिली सीटों की संख्या में करीब साढ़े तीन गुना इजाफा हो गया. राज्य में सात दिसम्बर को मतदान और 11 दिसंबर को वोटों की गिनती के बाद वसुंधरा राजे की सरकार बहुमत से दूर रह गई और अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है.

निर्वाचन विभाग से प्राप्त आंकडों के अनुसार 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षित 59 विधानसभा सीटों में से 50 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐसी केवल 21 सीटों पर जीत मिली है. 2018 के चुनाव परिणामों में भाजपा ने अनुसूचित जाति श्रेणी में 12 सीटें और अनुसूचित जन जाति श्रेणी में नौ सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, कांग्रेस ने अनूसूचित जाति की श्रेणी में 19 सीटें और अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 12 सीटों पर दर्ज हांसिल की है.

भाजपा विरोधी हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोक तांत्रिक पार्टी ने अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित दो सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं एक सीट निर्दलीय के खाते में गई. दो अनुसूचित जनजाति सीटों पर निर्दलीयों ने और दो सीटों पर भारतीय ट्राइबल पार्टी ने चुनाव जीता है.

राजस्‍थान: सीएम पद की दौड़ में अशोक गहलोत आगे, ‘पायलट’ बनने से चूक गए सचिन!

राजनैतिक पर्यवक्षकों ने एससी / एसटी अधिनियम प्रावधानों में किये गये बदलाव के विरोध में दो अप्रैल को ‘भारत बंद’ और सत्ता विरोधी तत्वों के कारण भाजपा को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है. राज्य में एससी / एसटी अधिनियम प्रावधानों में किए गए बदलाव के विरोध में दलित समूहों ने रेल/सडक यातायात को जाम करने के साथ साथ सम्पत्ति का नुकसान किया था. इसके कुछ दिन बाद राज्य के कई हिस्सों में सवर्ण समाज के लोगों ने शांतिपूर्वक बंद का आयोजन किया था.

Rajasthan Assembly Elections 2018: कांग्रेस से 1 लाख 70 हजार वोट कम मिले भाजपा को, इसलिए चली गई वसुंधरा राजे की सरकार

जनता की नाराजगी झेल रही कांग्रेस ने राज्य के पूर्वी जिलों में अनुसूचित जाति और जनजाति बाहुल्य क्षेत्र की अधिकतर सीटों पर दर्ज की है. इस चुनाव में भाजपा अलवर, भरतपुर, दौसा, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और टोंक जिले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई.