नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने मप्र की कमलनाथ सरकार को राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का निर्देश देने के लिये पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की और कल यानि बुधवार को सुबह 10.30 बजे अगली सुनवाई तय की है. सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की खंडपीठ ने मध्‍य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को नोटिस भी जारी किया और बुधवार को अगली सुनवाई का समय मुकर्रर किया. Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के 16 बागी विधायकों को शिवराज सिंह चौहान के मामले में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति के लिए याचिका दायर करने की मंजूरी दी. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

बता दें कि सोमवार को कमलनाथ सरकार को राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का निर्देश देने के लिए मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व अन्‍य नेताओं ने याचिका दायर की थी. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

दरअसल, सोमवार को तेजी से हुए घटनाक्रम में चौहान और भाजपा के नौ विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति के राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए शक्ति परीक्षण कराए बिना 26 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित किये जाने के तुरंत बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. विधानसभ अध्‍यक्ष प्रजापति ने कोरोना वायरस का हवाला देकर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी थी.

याचिका का अविलंब सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के संबंधित अधिकारी के समक्ष उल्लेख किया गया जिसमें विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और विधानसभा के प्रधान सचिव को मध्य प्रदेश विधानसभा में इस अदालत के आदेश देने के 12 घंटे के भीतर राज्यपाल के निर्देशों के अनुसार शक्ति परीक्षण कराने का आदेश देने की मांग की गई है.

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 16 मार्च को सदन में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था. शीर्ष अदालत में सोमवार को संबंधित अधिकारी के समक्ष इस मामले की शीघ्र सुनवाई के लिये उल्लेख किया गया है.

अधिवक्ता सौरभ मिश्रा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफा के बाद कमलनाथ सरकार विश्वास खो चुकी है. इन 22 विधायकों में से छह के इस्तीफे अध्यक्ष पहले ही स्वीकार कर चुके हैं और अब मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में आ गई है. ऐसी स्थिति में कमलनाथ सरकार को एक दिन भी सत्ता में रहने का कोई कानूनी, नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं .