भोपाल: बेंगलुरु में ठहरे मध्यप्रदेश कांग्रेस के सिंधिया खेमे के विधायकों का भोपाल आने का कार्यक्रम अंतिम क्षणों में बेंगलुरु हवाई अड्डे पर रद्द हो गया. बताया गया है कि भोपाल हवाई अड्डे पर कांग्रेस कार्यकर्ता लाठी-डंडों के साथ जमा हो गए थे, इसलिए सुरक्षा कारणों के चलते अंतिम क्षणों में बेंगलुरु हवाई अड्डे से भोपाल के लिए उड़ान भरने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया. वहीं, मध्यप्रदेश में जारी राजनीतिक संकट के बीच विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने शुक्रवार को कहा कि इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के छह विधायक अपने इस्तीफे के सत्यापन के लिए व्यक्तिगत तौर पर शुक्रवार को उनके समक्ष पेश नहीं हुए. Also Read - मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से एक और मौत, प्रदेश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 47 हुई

मध्य प्रदेश की राजधानी में कांग्रेस और भाजपा के समर्थकों के एकत्र होने के बाद भोपाल हवाई अड्डे पर सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी गई. पुलिस ने जब देखा कि भोपाल हवाई अड्डे पर कांग्रेस और बीजेपी के समर्थक बड़ी संख्‍या में इकट्ठा हैं तो सुरक्षा बढ़ा दी गई और धारा 144 लगा दी गई. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

भाजपा में शामिल हुए सिंधिया के कट्टर समर्थक पंकज चतुर्वेदी ने शुक्रवार को बताया कि यहां भोपाल हवाई अड्डे पर कांग्रेस कार्यकर्ता लाठी-डंडों के साथ जमा हो गए थे, इसलिए सुरक्षा कारणों के चलते अंतिम क्षणों में बेंगलुरु हवाई अड्डे से भोपाल के लिए उड़ान भरने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया. उन्होंने बताया कि फिलहाल ये विधायक बेंगलुरु में ही हैं. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

इससे पहले टीवी चैनलों में इन विधायकों को बेंगलुरु हवाई अड्डे के लाऊंज में इंतजार में बैठे होने के वीडियो फुटेज भी दिखाए थे.

कमलनाथ सरकार संकट में
मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिधिंया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद प्रदेश कांग्रेस के 22 विधायकों ने त्यागपत्र भेजा था. उनमें से सिंधिया समर्थक 19 विधायक बेंगलुरु में ठहरे हुए हैं. सिंधिया समर्थक विधायकों के कथित तौर पर कांग्रेस से बागी होने से मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कमलनाथ सरकार संकट में आ गई है.

इस्तीफा देने वाले विधायक विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष नहीं हुए पेश
मध्यप्रदेश में जारी राजनीतिक संकट के बीच विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने शुक्रवार को कहा कि इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के छह विधायक अपने इस्तीफे के सत्यापन के लिए व्यक्तिगत तौर पर शुक्रवार को उनके समक्ष पेश नहीं हुए.

कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में ये मंत्री थे
ये विधायक इमरती देवी, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, महेन्द्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर और डॉ. प्रभुराम चौधरी हैं. ये सभी कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री थे. लेकिन राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ की सलाह पर शुक्रवार को उन्हें तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटा दिया है.

रादित्य सिंधिया के समर्थक हैं ये सभी कांग्रेस विधायक
ये सभी कांग्रेस विधायक हैं और भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं. सिंधिया द्वारा कांग्रेस छोड़ने पर इन्होंने मंगलवार को विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया था. इनके अलावा, उस दिन कांग्रेस के अन्य 16 विधायकों ने भी इस्तीफा दिया था. इससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने के कगार पर पहुंच गई है.

कल फिर उनका इंतजार करूंगा
प्रजापति ने कहा, ‘‘नियम प्रक्रिया के तहत मैंने इन छह विधायकों को उनके द्वारा विधानसभा सदस्यता से दिये गये इस्तीफे के सत्यापन के लिए व्यक्तिगत तौर पर आज तलब किया था. मैंने उन्हें दिए गये तय समय से तीन घंटे ज्यादा समय तक इंतजार किया, किंतु उनमें से कोई नहीं आया.’’ उन्होंने कहा कि अब इन विधायकों को अगली तारीख दूंगा. प्रजापति ने बताया, ‘‘मैंने इस्तीफे देने वाले अन्य विधायकों को कल (शनिवार) तारीख दे रखी है. कल फिर उनका इंतजार करूंगा. ’’

सत्यापन के लिए अलग-अलग बुलाया
इसी बीच, मध्यप्रदेश सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के सात विधायकों को इस्तीफे के सत्यापन के लिए व्यक्तिगत तौर पर शनिवार को बुलाया है, जबकि इस्तीफा देने वाले बाकी विधायकों को रविवार को तलब किया है.