इंदौर : मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों में वसूले जाने वाले रख-रखाव शुल्क में करीब चार गुना की बढ़ोत्तरी के खिलाफ आज राज्य भर में छोटे उद्योगपति लामबंद होकर सड़क पर उतरे. इस वर्ष राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. लघु और मध्यम व्यापारियों ने चुनावी वर्ष में विरोध प्रदर्शन तेज करते हुए प्रदेश सरकार से इस शुल्क वृद्धि को फौरन वापस लेने की मांग की.

एआईएमपी और लघु उद्योग भारती के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन
ये प्रदर्शन एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश (एआईएमपी) और लघु उद्योग भारती के आह्वान पर किए गए. ये संगठन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की राज्य की 6,000 से ज्यादा इकाइयों की नुमाइंदगी का दावा करते हैं. एआईएमपी के अध्यक्ष आलोक दवे ने यहां संवाददाताओं से कहा कि प्रदेश सरकार ने जिला उद्योग केंद्रों (डीआईसी) के तहत आने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों से वसूले जाने वाले रख-रखाव शुल्क को 2.4 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 10 रुपये वर्ग मीटर कर दिया है. इस शुल्क वृद्धि के पीछे वर्ष 2015 के एक आदेश का हवाला दिया जा रहा है.

छोटे उद्योग भारी भरकम रख रखाव शुल्क उठाने में अक्षम
अलोक दवे ने आरोप लगाया कि डीआईसी के अफसर उद्योगपतियों पर दबाव बना रहे हैं कि वे पिछले तीन वित्तीय वर्षों-2015-16, 2016-17 और 2017-18 का रख-रखाव शुल्क न केवल बढ़ी दरों के आधार पर जमा करें, बल्कि इसके साथ ही तय जुर्माने और ब्याज की रकम भी अदा करें. दवे ने कहा रख-रखाव शुल्क में अचानक की गई शुल्क वृद्धि सरासर अनुचित है और छोटे उद्योग इसका भारी बोझ उठाने में सक्षम नहीं हैं. लिहाजा राज्य सरकार को इस शुल्क वृद्धि को फौरन वापस लेना चाहिए. उन्होंने बताया कि रख-रखाव शुल्क वृद्धि के खिलाफ इंदौर के साथ धार, देवास, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, कटनी, उज्जैन और अन्य जिलों में उद्योगपतियों ने विरोध प्रदर्शन किया.
( इनपुट एजेंसी )