भोपाल/ नई दिल्‍ली: मध्‍य प्रदेश में भारी सियासी उथल-पुथल के बाद कांग्रेस नीत सरकार के मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार दोपहर में इस्‍तीफा दे दिया. लेकिन इसके बाद बीजेपी में सीएम पद के संभावित चेहरों में शुमार पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिनभर चले सियासी घटनाक्रम के बाद रात में केयरटेकर मुख्‍यमंत्री कमलनाथ से उनके निवास श्‍यामला हिल्‍स स्थित बंगले पर मिलने पहुंच गए. Also Read - Coronavirus को लेकर राम गोपाल वर्मा ने किया भद्दा मज़ाक, यूजर्स बोले- थोड़ी तो शरम करो, पुलिस लेगी एक्शन

दोनों नेताओं की इस मुलाकात के कई मायने निकाले जाएंगे,जिसमें कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान की इस सौहार्द और सौजन्‍य भेंट पर यह मुलाकात की. शिवराज सिंह चौहान को मुख्‍यमंत्री पद उतारने के मिशन में कमलनाथ कामायाब रहे, वहीं, बीजेपी का प्‍लान था या कांग्रेस में रहे ज्‍योतिरादित्‍य से कमलनाथ का टकराव जिसने कमलनाथ को सत्‍ता से हटाया. लेकिन मध्‍य प्रदेश की राजनीति में 12 सालों से जो चेहरा केंद्र बना रहा, वह अब भी बार-बार अपनी सियासी ताकत और जमीनी पकड़ का एहसास विरोधियों को करता है तो पार्टी के नेताओं को भी इशारा करता रहता है कि टाइगर अभी जिंदा है. वहीं, कमलनाथ राजनीति के अपने लंबे कॅरियर में शायद यह सबसे बड़ी चुनौती का सामना किया और अब सूबे की सियासत से उनकी विदाई लगभग तय ही हो चुकी है. Also Read - कोरोना संकट के खिलाफ जंग में जुटी महिला डॉक्‍टरों पर किया था हमला, 7 आरोपी गिरफ्तार

बता दें 15 महीने पहले मध्‍य प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष पद की जिम्‍मेदारी संभालने के बाद 15 साल बाद बीजेपी की शिवराज सिंह चौहान सरकार को कड़े मुकाबले में चुनावी मात दे दी थी. मुख्‍यमंत्री की कुर्सी खोने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान कमलनाथ के सीएम मिलने पर उनसे मिलने गए थे बधाई दी थी और अज उनके मुख्‍यमंत्री पद खोने से इस्‍तीफा देने के बाद कमलनाथ से मिलने पहुंच गए.

सत्‍ता में सवार होने जा रही बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान आज रात पार्टी विधायकों को डिनर देने वाले थे, लेकिन इसे कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर टाल दिया गया. फिलहाल वजह तो यही मानी जाएगी, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि शिवराज को ज्‍यादा जश्‍न न मनाने के संकेत पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व की ओर से मिलने लगा हो. कमलनाथ के इस्‍तीफे के बाद से कौन होगा मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री? इसका जवाब सियासी गलियारों में सबसे ज्‍यादा तलाशा जा रहा है.शिवराज सिंह चौहान मध्‍य प्रदेश में संभावित राजनीति के मद्देनजर केंद्रीय नेतृत्‍व के संकेतों के बावजदू भी राज्‍य की राजनीति में जाने के प्रति बार-बार सार्वजनिक रूप से मध्‍य प्रदेश की जनता की सेवा की बात कहते नजर आते रहें हैं.

कमलनाथ के नेतृत्‍ववाली कांग्रेस सरकार का पतन हो जाने के बाद बीजेपी के जिन चेहरों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, उनमें शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्‍तम मिश्रा, वीडी शर्मा, कैलाश विजयवर्गीय शामिल हैं.

आज कमलनाथ सरकार का महज 15 महीने में ही पतन हो गया. विपक्ष में रही बीजेपी के नेताओं को सत्‍ता का स्‍वाद बहुत जल्‍द मिलने जा रहा है. जबकि राज्‍य विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कई मंत्र‍ियों और चर्चित विधायकों की हार हुई थी. यह स्थिति आज भी बीजेपी को आत्‍ममंथन और मूल्‍यांकन करने के लिए कहती है, भले ही विरोधी दल की सरकार को तोड़कर फिर से सत्‍ता पर काबिज होने जा रही है.

विधानसभा चुनाव में बहुमत से कुछ सीटें पीछे रहने के बाद निर्दलीय, बीएसपी और सपा के विधायकों के समर्थन से बनी कांग्रेस सरकार अपने ही पार्टी के नेताओं की गुटबाजी और अंत‍रविरोधों की बलि चढ़ गई. लेकिन सत्‍ताओं के आने-जाने के बावजूद भी विरोधी पार्टियों के कई नेताओं के जो रिश्‍ते होतें हैं, उनकी गहराई की माप पर्दे के पीछे रहकर की जाती है. आज कमलनाथ की कुर्सी गई है, 15 महीने पहले शिवराज से छीनी थी, आज बीजेपी के नेताओं में कोई इस कुर्सी पर बैठेगा, लेकिन राजनीतिक जंग के बीच ये रिश्‍ते भी खूब हैं.