शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल में एक आंगनबाड़ी केंद्र पर एक बच्ची खौलती हुई दाल के पतीले में गिर गई. बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया. शर्मनाक ये भी है कि आंगनबाड़ी केंद्र स्टाफ ने परिजनों को बच्ची के इलाज के लिए सिर्फ 250 दिए. अस्पताल प्रशासन, परिजनों या अन्य किसी ने भी पुलिस को सूचित करना जरूरी नहीं समझा. चौथे दिन जब पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस ने हालत देख बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. बच्ची की उसी दिन मौत हो गई. Also Read - Coronavirus: इंदौर में ड्यूटी पर तैनात 3,000 पुलिसकर्मियों को परिवार से दूरी बनाए रखने की सलाह

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सहायिका थी गायब, तभी खौलते हुए पतीले में गिरी बच्ची
घटना मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जोधपुर इलाके में भर्राटोला के सरकारी स्कूल की है. स्कूल से कुछ मीटर दूरी पर आंगनबाड़ी केंद्र है. स्कूल के लिए मिड-डे मील आंगनबाड़ी केंद्र पर ही पक रहा था. स्कूल में पढ़ने वाली सुहासिनी बैगा नाम की पांच साल की बच्ची आंगनबाड़ी केंद्र चली गई. यहां मिड-डे मील के लिए एक बड़े पतीले में चूल्हे पर दाल उबल रही थी. बच्ची इस पतीले के बिलकुल नजदीक थी, तभी वह पतीले में गिर गई. आंगनबाड़ी केंद्र की खाना बनाने वाली सहायिका कायसी बैगा के अनुसार वह दूसरे कमरे में चावल लेने गई थी. चीखने की आवाज सुन वह दौड़ कर आई तो देखा बच्ची पतीले में थी. उसने बाहर निकाला. बच्ची के पिता को सूचित किया. बच्ची के पिता बाईसखु बैगा द्वारा बच्ची को जिला अस्पताल ले जाया गया. Also Read - COVID-19: कोरोना की चपेट में आया पत्रकार, कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेस में था मौजूद

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चौथे दिन पता चलने पर निजी अस्पताल ले गई पुलिस
बच्ची 50 प्रतिशत जल गई थी. बच्ची के आर्थिक रूप से कमजोर पिता के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र के स्टाफ द्वारा उसे सिर्फ 250 रुपए इलाज के लिए दिए गए. तीन दिन तक बच्ची का इलाज जिला अस्पताल में होता रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन या अन्य ने मामले को लेकर पुलिस को सूचित करना जरूरी नहीं समझा. 28 अगस्त, मंगलवार को चौथे दिन अस्पताल प्रशासन ने बच्ची की हालत बेहद बिगड़ने पर पुलिस को सूचित किया. पुलिस ने गंभीर हालत में पहुंची बच्ची को जबलपुर जिले के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन मंगलवार की ही शाम यहां बच्ची की मौत हो गई.

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मौत के बाद घटना की जांच के आदेश
सहायक जिला डिवीजनल मजिस्ट्रेट अशोक ओहरी ने बताया कि बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी. कलक्टर ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं. घटना के पीछे जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उसे नौकरी से हटा दिया जाएगा. लोगों के अनुसार, अगर बच्ची को सही समय पर सही इलाज मिलता तो वह बच सकती थी. बच्ची का परिवार इतना गरीब था कि अच्छी जगह इलाज नहीं करा पाया. चौथे दिन सूचना मिलने पर पुलिस ने बच्ची की हालत देख बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.