नई दिल्ली: भोपाल के एक कॉलेज पर शैक्षणिक सत्र 2017-2018 के लिए छात्रों के दाखिले पर एमसीआई की तरफ से लगाई गई रोक के बाद 150 छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे संकट के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है. शीर्ष कोर्ट ने इस संकट से निपटने के लिए एमसीआई से कोई हल निकालने और मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में शिक्षण सत्र 2017-2018 के लिए रिक्त पड़ी सीटों का ब्योरा देने को कहा है.

जस्टिस यूयू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ ने स्थिति पर चिंता जताई और यह जानना चाहा कि इस मामले से निपटने का क्या तरीका हो सकता है, जहां केंद्रीय काउंसलिंग एजेंसी ने छात्रों को एक कॉलेज में सीट आवंटित की और वह कॉलेज बाद में संकट में आ गया. बेंच कहा, ऐसा नहीं है कि कॉलेज ने दाखिला परदर्शी तरीके से नहीं दिया, बल्कि राज्य प्रशासन ने छात्रों को इस कॉलेज में भेजा या जाने का निर्देश दिया. क्या छात्रों को अब संकट में छोड़ा जा सकता है.”

एमपी सरकार के वकील को फटरकार
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की पैरवी कर रहे वकील अर्जुन गर्ग ने कहा राज्य के किसी भी मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2017-2018 के लिए कोई भी सीट रिक्त नहीं है. इस पर बेंच ने कहा कि किसके निर्देश पर वह इस तरह के बयान देते आ रहे हैं साथ ही उन्हें आगाह किया कि बाद में अगर ये तथ्य गलत पाए गए तो वह संबंधित अधिकारी को फंसा सकते हैं.

एमसीआई अपनी राय रखे
पीठ ने कहा कि एमसीआई को इस मामले में अपनी राय रखनी चाहिए और अगर उसके पास कोई सुझाव हो तो वह भी बताना चाहिए.

ये है मामला
दरअसल मामला आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से जुड़ा हुआ है, जिसे केंद्र और एमसीआई ने शिक्षण सत्र 2014-2015 के लिए एमबीबीएस कोर्स के लिए छात्रों के दाखिले की अनुमति दी थी. हालांकि बाद में अगले सत्र 2015-2016 में एमसीआई ने कॉलेज का निरीक्षण किया और उसे नवीकरण अनुमति नहीं दी साथ ही उसे छात्रों की भर्ती करने पर रोक लगा दी.

ये हुआ था
– कॉलेज को शिक्षण सत्र 2016-2017 के लिए फिर से छात्रों को दाखिला देने की अनुमति दी गई, लेकिन 2017-2018 के लिए फिर से रोक लगा दी गई।

– सुप्रीम कोर्ट ने हालाकि बाद में एक अंतरिम आदेश में कॉलेज को शिक्षण सत्र 2017-2018 के लिए 150 छात्रों को दाखिला देने की अनुमति दी थी
– सभी 150 छात्रों को कॉलेज में दाखिला दिया गया और इसके लिए पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ” दर्ज तथ्य इस ओर इशारा करते हैं कि शिक्षण सत्र 2017-2018 के लिए नवीकरण अनुमति नहीं दी गई थी जिसके बाद उन छात्रों की स्थिति और उनके अधिकारों पर विचार करना होगा, जिन्हें अंतरिम आदेश के जरिए दाखिला दिया गया था.”