नई दिल्ली. मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक रचनात्मक विज्ञापन अभियान चलाया था. इसमें प्रदेश के विभिन्न पर्यटक स्थलों के वर्णन के बाद आखिर में एक लाइन आती थी, ‘एमपी गजब है’. साल 2013 में आया यह विज्ञापन, प्रचार-प्रसार की दृष्टि से सरकार का अच्छा प्रयास था. अभी इस विज्ञापन के जिक्र का मतलब कुछ और है. दरअसल, प्रदेश के एक आध्यात्मिक गुरु और मध्यप्रदेश गौ संवर्द्धन बोर्ड के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने राज्य सरकार से मांग की है कि वे प्रदेश में गायों के लिए मंत्रालय बनाएं. स्वामी का तर्क है कि सरकार के ‘गजब मध्यप्रदेश’ को ‘गोल्डन मध्यप्रदेश’ बनाने के लिए राज्य में ‘गौ-मंत्रालय’ बनाया जाना जरूरी है. उनका यह भी कहना है कि अगर राज्य सरकार ऐसा करती है तो यह पहल एक नजीर बनेगा. बता दें कि स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि को राज्य सरकार ने बीते दिनों कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया है. इसके पहले उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था.Also Read - PM Awas Yojana में मिली गड़बड़ी तो मंच से ही CM शिवराज ने अफसरों को किया सस्पेंड, कहा-जेल भेजेंगे, देखें VIDEO

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मंत्रालय बनाने के लिए दिया प्रस्ताव
स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने मध्यप्रदेश गौ संवर्द्धन बोर्ड के प्रस्ताव में इस मंत्रालय के संभावित कार्य क्षेत्र का भी जिक्र किया है. स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा है कि इस मंत्रालय के अधीन महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से संबंधित कार्य हो सकेंगे. मनरेगा के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड का एक हिस्सा यह मंत्रालय खर्च कर सकेगा. स्वामी का तर्क है, ‘अगर आनंद मंत्रालय (हैप्पीनेस मिनिस्ट्री) का गठन किया जा सकता है तो गौ-मंत्रालय क्यों नहीं बन सकता. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने आवास पर गाय पाल रखी है. गौ संवर्द्धन बोर्ड ने इसके संबंध में एक प्रस्ताव बनाया है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री के पास भेजा जाएगा.’ उनका कहना है कि वर्तमान में प्रदेश में जितने गौशालाएं हैं, वे सभी इस मंत्रालय की नोडल एजेंसी के रूप में काम करेंगी. Also Read - MP News: शिवराज सरकार की सख्ती-60 अस्पतालों के लाइसेंस रद, 301 को कारण बताओ नोटिस

गाय को पशु की श्रेणी में न रखा जाए
मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने गौ-मंत्रालय के प्रस्ताव के साथ कुछ और सलाह भी दी है. इसके तहत गिरि ने कहा है, ‘अभी गायों से संबंधित मामले पशुपालन मंत्रालय के अधीन होते हैं. लेकिन गाय को पशुओं की श्रेणी में रखा जाना उचित नहीं है. इसलिए गायों के लिए अलग से मंत्रालय बनाया जाना चाहिए. इससे प्रदेश के गौ-संरक्षण अभियान को बल मिलेगा.’ स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा, ‘मध्यप्रदेश गौ संवर्द्धन बोर्ड का सालाना बजट 16 करोड़ रुपयों का है, लेकिन इसके पास कोई अधिकार नहीं है. गायों के लिए अलग से मंत्रालय बनने के बाद बोर्ड के अधिकार भी बढ़ेंगे.’ स्वामी ने कहा कि गौ-मंत्रालय के गठन के बाद यह गांवों में रोजगार सृजन में सहायक होगा. साथ ही गायों से संबंधित अनुसंधान कार्य भी तेज होंगे. स्वामी ने कहा कि मनरेगा का फंड मिलने के बाद मंत्रालय को 1 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे, जिससे प्रदेश में गायों के संरक्षण के लिए कई कार्य किए जा सकेंगे.