नई दिल्‍ली: मध्‍य प्रदेश में बड़े सियासी तूफान थमने के बाद राज्‍य की कमान चौथी बार शिवराज सिंह चौहान संभालने जा रहे हैं. 13 साल तक लगातार मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री रहने का इतिहास बना चुके शिवराज सिंह चौहान इस पद के सबसे प्रमुख दावेदार रहे और अंतत: पार्टी हाईकमान ने शिवराज पर भी भरोसा जताया हैं. शिवराज महज डेढ़ साल बाद एक बार फिर से मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री की जिम्‍मेदारी संभालने जा रहे हैं. बदले हालातों में मध्‍य प्रदेश के नए मुख्‍यमंत्री के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां होंगे, जिनका उन्‍हें सामना करना होगा. Also Read - मध्यप्रदेश में कोरोना से एक और व्यक्ति ने तोड़ा दम, राज्य में संक्रमितों की संख्या 155 हुई 

देश-दुनिया और राज्‍य में छाए कोरोना संकट के बीच शिवराज सिंह चौहान शपथ ले रहें हैं. अभी उनकी तात्‍कालिक चुनौती कोराना वायरस महामारी है, लेकिन अब राज्‍य की सियासत और बीजेपी के अंदर काफी कुछ बदल चुका है. बीजेपी के पास अभी कुल 230 सीटों के अनुपात में बहुमत के लिए  पर्याप्‍त संख्‍या बल नहीं है. कांग्रेस के विधायकों की रिक्‍त सीटों को छोड़कर मौजूदा संख्‍याबाल के अनुपात पर शिवराज सीएम बनने जा रहे हैं. रिक्‍त सीटों के उपचुनाव में बीजेपी को कम से कम 10 सीटें जीतना जरूरी होगा. Also Read - दिग्विजय सिंह अमर्यादित भाषा वाले आ रहे कॉल्‍स से हुए परेशान, बंद किया मोबाइल फोन

राज्‍य बदले समीकरणों के चलते कांग्रेस भले ही सत्‍ता से हट गई है, लेकिन कई मुद्दे और समस्‍याएं भी अपने पीछे छोड़ गई है. शिवराज के नेतृत्‍व में ही लड़े गए पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी बहुमत से दूर रह गई थी. तत्‍कालीन सरकार की छवि स्‍वार्थी और घमंडी मंत्रियों का रवैया, विधायक और पार्टी के नेताओं द्वारा निचले स्‍तर के कार्यकर्ताओं और स्‍थानीय नेताओं की उपेक्षा और निरंकुश नौकरशाही, भ्रष्‍ट प्रशासनिक व्‍यवस्‍था ने ब्रांड शिवराज को नकार दिया था और कई मंत्री मैदान में शिकस्‍त खा गए थे. यह पुरानी छवि भी शिवराज को तोड़नी होगी. Also Read - Coronavirus को लेकर राम गोपाल वर्मा ने किया भद्दा मज़ाक, यूजर्स बोले- थोड़ी तो शरम करो, पुलिस लेगी एक्शन

अब बीजेपी अपने 107 विधायकों और कुछ अन्‍य के समर्थन और कांग्रेस की 22 सीटों खाली होने के चलते अपनी सरकार बनाने जा रही है. मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटें में आगे आने वाले दिनों में बीजेपी को कम से कम 116 सीटों का जुगाड़ करना होगा. ऐसे में बीजेपी और उसके मुख्‍यमंत्री के सामने आगे की राह बहुत कठिन नहीं तो बहुत आसान भी नहीं होगी. शिवराज बीजेपी के एक बार फिर ट्रंपकार्ड बनकर सामने आ गए हैं और मुख्‍यमंत्री संभालने के बाद उनके सामने कुछ ये बड़ी चुनौतियां होंगी.

बड़ी चुनौतियां
1. ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया समर्थक कांग्रेस विधायकों के इस्‍तीफे से खाली हुई सीटों पर अधिकांश में जीत दर्ज करना होगी
2. ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया समर्थक बागी हुए पूर्व कांग्रेस विधायकों को चुनाव में टिकट देना, उन्‍हें जिताना और अपने संगठन के पुराने स्‍थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाए रखना होगा
3. मध्‍य प्रदेश में मुख्‍यमंत्री पद के पहले ज्‍यादा दावेदार सामने नहीं थे, लेकिन अब कई नाम आ चुके हैं
4. पिछले दिनों से एमपी में सीएम के जिन दावेदारों के नाम सामने आए, उनमें प्रमुख हैं, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्‍तम मिश्रा, वीडी शर्मा, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, थावरचंद गहलोत, सांसद राकेश सिंह, गोपाल भार्गव आदि हैं
5. नए मुख्‍यमंत्री को अब अधिक संतुलन बनाकर चलना होगा
6. बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्‍व की प्रदर्शन की अपेक्षाएं भी अधिक होंगी
7. पार्टी के अंदर विधायकों की संभावित फूट को भी संभालना होगा
8. वर्तमान में कोरोना संकट
9. भ्रष्‍ट प्रशासनिक मशीनरी और निरंकुश नौकरशाही
10. मध्‍य प्रदेश की खराब आर्थिक हालत के बीच तेज विकास की चुनौती

ये है मध्‍य प्रदेश विधानसभा में सीटों की स्थिति
– मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं
– 2 सीटें खाली, इनमें से दो विधायकों (एक कांग्रेस एवं एक भाजपा) के निधन से दो सीटें खाली हैं
– कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो चुके हैं
– इस समय केवल 206 विधायक ही रह गए हैं
– इनमें से बीजेपी विधायकों की संख्या 107 है
– कांग्रेस के विधायकों की संख्‍या 92 विधायक हैं
– मध्‍य प्रदेश में चार निर्दलीय विधायक
– दो बसपा एवं एक सपा का विधायक है

कुल सीटों के आधार पर बहुमत का जरूरी आंकड़ा- 116 सीटें