भोपाल: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक माहौल फिर गर्माया हुआ है. केंद्रीय मंत्री और अयोध्या आंदोलन के अगुआ में रहीं उमा भारती ने कहा है कि अब राम मंदिर का निर्माण न करने का कोई बहाना नहीं चलने वाला. उन्‍होंने उत्तर प्रदेश में योगी जी की सरकार है और केंद्र में मोदी जी की सरकार है, अब राम मंदिर नहीं बनाने के लिए हमारे पास कोई बहाना नहीं है.”

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प्रदेश में योगी जी और केंद्र में मोदी जी की सरकार
मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए आई उमा भारती ने सोमवार को यहां मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “मोहन भागवत हमारे परिवार के मुखिया हैं, हम सब उनकी बातों का अनुसरण करते हैं, लेकिन यह सत्य है कि उत्तर प्रदेश में योगी जी की सरकार है और केंद्र में मोदी जी की सरकार है, अब राम मंदिर नहीं बनाने के लिए हमारे पास कोई बहाना नहीं है.”

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मंदिर का केस कोर्ट की प्राथमिकता में नहीं है तो कानून लाना चाहिए
बता दें कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि धैर्य का समय अब खत्म हुआ और अगर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला उच्चतम न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है तो मंदिर निर्माण कार्य के लिए कानून लाना चाहिए. मोहन भागवत के बयान के बाद उमा भारती की प्रतिक्रिया ने यह जाहिर कर दिया है कि आयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा अब तूल पकड़ सकता है.

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धैर्य का समय खत्म हुआ, सरकार को कानून लाना चाहिए : भागवत
नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा था कि धैर्य का समय अब खत्म हुआ और अगर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला उच्चतम न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है तो मंदिर निर्माण कार्य के लिए कानून लाना चाहिए.

अब मैं ही कह रहा हूं कि धैर्य से काम नहीं होगा
भागवत ने ये बयान एक दिन पहले रविवार को नागपुर में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर विहिप की ओर से आयोजित एक रैली में कहा कि यह आंदोलन का निर्णायक चरण है. उन्होंने कहा, एक साल पहले मैंने स्वयं कहा था कि धैर्य रखें. अब मैं ही कह रहा हूं कि धैर्य से काम नहीं होगा. अब हमें लोगों को एकजुट करने की जरूरत है. अब हमें कानून की मांग करनी चाहिए.”

अब यह आंदोलन का निर्णायक चरण है
भागवत ने कहा, ”चाहे जो भी कारण हो क्योंकि अदालत के पास समय नहीं है या राम मंदिर मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है अथवा संभवत: वह समाज की संवेदनशीलता को नहीं समझ पा रही है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस बारे में विचारे कि मंदिर निर्माण के लिए कैसे एक कानून लाया जाए… कानून जल्द से जल्द लाया जाना चाहिए.” भागवत ने कहा, ”अब यह आंदोलन का निर्णायक चरण है.”