टीकमगढ़: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी-एसटी एक्ट को लेकर सुनाए गए फैसले को संसद में एक विधेयक के जरिए बदले जाने को लेकर विरोध जारी है. यहां कुछ ही माह में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में एससी/एसटी एक्ट को लेकर बीजेपी नेता भी इसके खिलाफ उतर रहे हैं. और इसे लेकर मध्य प्रदेश के बीजेपी नेता भी उतर आए हैं. यहां के टीकमगढ़ जिले के एक बीजेपी नेता ने इस्तीफा तक दे दिया है. नेताओं के बीच भी पार्टी के प्रति ये व्यवहार बीजेपी को मुश्किल में डाल सकता है. Also Read - Corona Guidelines for Navratri and Ramadan 2021: यूपी, बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक, जानिए इन 6 राज्यों में नवरात्र और रमजान को लेकर क्या हैं नियम?

Also Read - Covid in MP Update: MP के सीएम ने की जनता से अपील, लॉकडाउन की बजाय, मास्‍क से चेहरा और पैर लॉक हो जाएं

बीजेपी सरकार में मंत्री ने कहा- ‘अधिकतर SC/ST केस होते हैं फर्जी,’ एक दिन पहले ही घर पर फेंके गए थे अंडे-टमाटर Also Read - Lockdown in MP: मध्‍य प्रदेश में लॉकडाउन की फोटोज, आंकड़े दे रहे बड़ी चेतावनी

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के निवाड़ी मंडल में भारतीय जनता पार्टी के सह मीडिया प्रभारी बृजेंद्र तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. तिवारी द्वारा पार्टी नेतृत्व को लिखे गए इस्तीफे में कहा गया है कि सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए और तत्कालीन समय में सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट पर लिए गए निर्णय से देश के आंतरिक सुरक्षा और भाईचारे के लिए सही निर्णय नहीं है. तिवारी का मानना है कि केंद्र सरकार का यह निर्णय न्यायपालिका का अपमान और सामाजिक समरसता का विखंडन करने वाला है. लिहाजा, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

नए एससी-एसटी बिल को कैबिनेट की मंजूरी, इस सत्र में सरकार पारित कराएगी: राजनाथ

बता दें कि एससी/एसटी एक्ट में संसोधन लेकर आई बीजेपी सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहा है. मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान शिवराज सिंह चौहान पर जूता तक फेंक दिया गया. उन पर रथ यात्रा के दौरान पत्थर भी बरसाए गए. काले झंडे दिखाए गए. इसका विरोध सवर्ण जाति के लोग ही कर रहे हैं. इन्हें बीजेपी का पारंपरिक वोटर माना जाता है. लोगों का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने पर तुरंत ही गिरफ्तारी होने पर रोक लगा दी थी. अग्रिम जमानत का प्रावधान करने का फैसला सुनाया, फिर बीजेपी की केंद्र सरकार को इसमें संशोधन लाकर उसे फिर से उसी रूप में क्यों पहुंचाया. लोग इसे सवर्णों के खिलाफ साजिश बता रहे हैं.