भोपाल: कांग्रेस पार्टी में तवज्जो नहीं मिलने से खफा होकर ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने वर्ष 1967 में पार्टी छोड़ दी थी जिससे मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार गिर थी और अब 52 साल बाद उनके पौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस पार्टी से आहत होकर बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए, जिससे मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. Also Read - VIDEO: Coronavirus Lockdown के बीच DIG रात में साइकिल पर निकले

सिंधिया परिवार से लंबे समय से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि राजमाता विजयाराजे ने कांग्रेस में तवज्जो नहीं मिलने के कारण वर्ष 1967 में कांग्रेस छोड़ी थी और कुछ ही दिनों बाद भारतीय जनसंघ में शामिल हो गई थीं. इसके बाद जुलाई 1967 में मध्यप्रदेश की तत्कालीन द्वारका प्रसाद मिश्रा की कांग्रेस नीत सरकार गिर गई थी. अब कांग्रेस से आहत होकर उनके 49 वर्षीय पौत्र ज्योतिरादित्य भी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो गए हैं और मध्यप्रदेश की कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार पर संकट मंडरा रहा है. Also Read - MP में कोरोना संक्रमित पाए गए दो IPS अधिकारी, दोनों को भेजा गया Isolation Center

ज्योतिरादित्य की दादी राजमाता विजयाराजे देश के प्रथम प्रधानमंत्री एवं राहुल गांधी के परनाना पंडित जवाहरलाल नेहरू की कभी बहुत करीबी मानी जाती थीं. विजयाराजे ने अपना राजनीतक जीवन वर्ष 1957 में कांग्रेस से शुरू किया था और 10 साल इसमें रहने के बाद वर्ष 1967 में इस पार्टी को अलविदा कह दिया था. Also Read - मध्य प्रदेश में 'टोटल लॉकडाउन' के बाद लागू हुआ 'एस्मा', शिवराज सिंह चौहान ने दी जानकारी

सिंधिया परिवार के करीबी व्यक्ति ने कहा कि साल 1967 में लोकसभा एवं मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए एक साथ चुनाव हुए थे. राजमाता इस सिलसिले में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्रा से मिलने गई थीं, मिश्रा ने उनको दो घंटे प्रतीक्षा करवाई और तब उनसे मुलाकात की. इससे वह खफा हो गईं और उन्होंने कांग्रेस ही छोड़ दी थी.

सिंधिया परिवार के करीबी व्यक्ति ने कहा कि इसके बाद वह स्वतंत्र पार्टी के चुनाव चिह्न पर वर्ष 1967 का लोकसभा चुनाव लड़ीं और जीतीं. लेकिन कुछ ही दिनों बाद राज्य की राजनीति करने के लिए उन्होंने सांसद के पद से त्यागपत्र दे दिया और भारतीय जनसंघ में शामिल होकर मध्यप्रदेश की करेरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनीं. इसके बाद उन्होंने उसी साल मिश्रा की सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने कांग्रेस के 36 विधायक तोड़े और गोविंद नारायण सिंह को उनके स्थान पर मुख्यमंत्री बनवाया.

वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले ज्योतिरादित्य को अपनी समस्याओं को रखने के लिए बार-बार अनुरोध करने पर भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को दिल्ली में मिलने का समय नहीं दिया. सोनिया और कांग्रेस नेता राहुल द्वारा पार्टी में तवज्जो नहीं दिए जाने से हताश ज्योतिरादित्य ने पार्टी छोड़ी दी और उसके एक दिन बाद आज भाजपा में शामिल हो गए. इससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार पर संकट मंडरा रहा है.