मध्य प्रदेश में 1980 में चुरहट लॉटरी घोटाले में नाम आने के बाद अर्जुन सिंह पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ा तो राजीव गांधी की मंशा तत्कालीन रेल मंत्री माधव राव सिंधिया को मुख्यमंत्री बना कर मध्य प्रदेश भेजने की थी.  हालांकि अर्जुन सिंह किसी भी कीमत पर सीएम पद से हटने को तैयार नहीं थे. राजीव गांधी ने मन बना लिया था कि माधवराव सिंधिया को सीएम बनाना है इसलिए सिंधिया को चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली से भोपाल भेजा गया.

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पत्रकार और लेखक दीपक तिवारी अपनी किताब ‘राजनीतिनामा मध्यप्रदेश राजनेताओं के किस्से’ (1956 से 2003) में लिखते हैं कि देर रात विधायक दल की बैठक चलती रही. उस शाम ये तय था कि माधवराव सिंधिया ही अगले सीएम होंगे. यह माना जा रहा था कि उनके नाम की घोषणा की औपचारिकता रह गई है. एक अधिकारी ने अगले सीएम की फोटो लेने के लिए सरकारी फोटोग्राफार को भेजा. माधव राव ने उस अधिकारी को मना कर दिया जिसने फोटोग्राफर को भेजा था.

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माधव राव सिंधिया जानते थे कि कांग्रेस में जब तक कोई शपथ न ले ले तब तक यह सुनिश्चित नहीं होता कि सीएम वही है. हालांकि उस समय न अर्जुन सिंह सीएम बने न माधवराव सिंधिया. सीएम का सेहरा सजा मोती लाल वोरा के नाम. कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला एक जगह लिखते हैं कि अगर माधव राव सिंधिया थोड़ा चालाक होते तो पहले ही अर्जुन सिंह को मना लेते और फिर हाईकमान की ओर से अपना नाम आने देते.

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माधव राव सिंधिया के पास एक और मौका आया 1993 में जब दिग्वजिय सिंह सीएम बने उस समय मुख्यमंत्री बनने वालों की लिस्ट में माधवराव सिंधिया का भी नाम था. अर्जुन सिंह के लोगों ने माधव राव को सीएम पद की शपथ लेने के लिए तैयार रहने को कहा था. माधवराव ने एलान कर दिया था कि वह दिग्विजय सिंह का समर्थन नहीं करेंगे. उस समय दिग्विजय सिंह ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.

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हालांकि कहा जाता है कि माधवराव अपनी रियासत के छोटे से राजा को सीएम के रूप में नहीं देखना चाहते थे. इस बार भी माधव राव सिंधिया सीएम नहीं बन पाए. सिंतबर 2001 में माधवराव सिंधिया की उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में एक विमान हादसे में मृत्यु हो गई.

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अब इस साल मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत के बाद माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य  सिंधिया सीएम की रेस में शामिल हैं. पिता के अचानक चले जाने के बाद ज्योतिरादित्य ने 2001 में राजनीति में एंट्री की. एक जनवरी 1971 को ग्वालियर के सिंधिया राजघराने में जन्मे सिंधिया ने दून स्कूल के बाद अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और स्टैनफोर्ड स्कूल से एमबीए की पढ़ाई की है. वह 2002 में पहली बार पिता की परंपरागत गुना संसदीय सीट से चुनाव जीते थे.

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2004 के लोकसभा चुनाव में दोबारा इसी सीट से सांसद चुने गए. यूपीए-1 की मनमोहन सरकार में पहली बार 2007 में  केंद्रीय राज्य मंत्री बने. सिंधिया यूपीए-2 में भी 2012 में केंद्रीय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रहे. उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जो हलफनामा दिया था, उसके मुताबिक उनके पास 32 करोड़ 64 लाख 412 रुपये की संपत्ति है. ज्योतिरादित्य की 1984 बड़ौदा के गायकवाड़ घराने की प्रियदर्शिनी से शादी हुई.

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ज्योतिरादित्य सिंधिया का मुकाबला सीनियर नेता कमलनाथ से है. मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से लगातार नौ बार सांसद होने का रिकॉर्ड कमलनाथ के नाम है. 1995 से 1996 तक वह केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री रहे. 2001 से लेकर 2004 तक वह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रहे. 2004 में फिर चुनाव जीते तो मनमोहन सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हुए.

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2009 में फिर से छिंदवाड़ा सीट से जीते तो यूपीए दो सरकार में सड़क परिवहन मंत्री बने. 2011 में कैबिनेट में फेरबदल हुआ तो कमलनाथ को शहरी विकास मंत्री बनाया गया. अक्टूर 2012 में कमनाथ को संसदीय कार्यमंत्री की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली. 15 साल बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता मिली है. सीएम कौन होगा, कमलनाथ या ज्योतिरादित्य सिंधिया फैसला राहुल गांधी को लेना है.