नई दिल्ली: चंद लम्हों में किस्मत बदलना किसे कहते हैं? ये आप महेश मेहर और उनके भाई भरत से पूछ सकते हैं. मछली पकड़ने वाले इन भाइयों की किस्मत एक मछली ने बदल दी. अन्य दिनों की तरह दोनों भाई समुद्र में मछली मार रहे थे इस बीच उनके हाथ घोल मछली लग गई जिसने उन्हें लखपति बना दिया. शुक्रवार को मछुआरे रोज की तरह पालघर समुद्रतट पर मछलियां पकड़ने गए थे. यहां उसके जाल में घोल मछली फंस गई जो 5.5 लाख रुपए में बिकी.

मुंबई के मछुआरे महेश अपने भाई के साथ शुक्रवार को मछली पकड़ने गए थे. उनके जाल में एक 30 किलो की मछली फंस गई. यह कोई सामान्य मछली नहीं थी बल्कि घोल मछली थी. सोमवार को इस मछली की बोली लगाई गई. बोली बीस मिनट तक चली और मछली को 5.5 लाख रुपये में एक व्यापारी ने खरीद लिया. घोल मछली खाने में स्वादिष्ट तो होती ही है. इस मछली में चमत्कारी औषधीय गुण पाए जाते हैं जिसके कारण पूर्वी एशिया में इसकी कीमत बहुत ज्यादा है. यहां तक कि घोल (ब्लैकस्पॉटेड क्रॉकर, वैज्ञानिक नाम प्रोटोनिबा डायकांथस) को ‘सोने के दिल वाली मछली’ के रूप में भी जाना जाता है.

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घोल मछली की स्किन में उच्च गुणवत्ता वाला कोलेजन (मज्जा) पाया जाता है. इस कोलेजन को दवाओं के अलावा क्रियाशील आहार, कॉस्मेटिक उत्पादों को बनाने में प्रयोग किया जाता है. बीते कुछ वर्षों में इन सामग्री की वैश्विक मांग बढ़ रही है. यहां तक कि घोल का महंगा कमर्शल प्रयोग भी होता है. उदाहरण के तौर पर मछली के पंखों को दवा बनाने वाली कंपनियां घुलनशील सिलाई और वाइन शुद्धि के लिए इस्तेमाल करती हैं.

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यह मछली मुख्यत: सिंगापुर, मलयेशिया, इंडोनेशिया, हॉन्ग-कॉन्ग और जापान में निर्यात की जाती है. घोल मछली जो सबसे सस्ती होती है उसकी कीमत भी 8,000 से 10,000 तक होती है.’ मई में भायंदर के एक मछुआरे विलियम गबरू ने यूटान से एक मंहगी घोल पकड़ी थी. वह मछली 5.16 लाख रुपये में बिकी थी.