मुंबई| शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन ना करने और अगले साल होने वाले लोकसभा तथा आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने के लिए मंगलवार को एक प्रस्ताव पारित किया. शिवसेना सांसद संजय राउत ने यह प्रस्ताव पेश किया और कहा कि बीजेपी पिछले तीन सालों से पार्टी को हतोत्साहित करती आ रही है. मुंबई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ. Also Read - कोरोना वायरस के 'इलाज और टीके' के लिए पीएम मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से बात

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  • साल 1989 में शिवसेना और बीजेपी के बीच गठबंधन हुआ. दोनों ही पार्टी हिंदुत्व के मुद्दे पर एक साथ आई. कई बार उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में यह बात कही भी हैं. इसके बाद दोनों पार्टियों ने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया.
  • साल 1995 में महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को बहुमत मिला. शिवसेना की ओर से पहले मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने और फिर नारायण राणे. बीजेपी ने गोपीनाथ मुंडे को राज्य के गृह मंत्री बनाया. शिवसेना-बीजेपी गठबंधन की सरकार 1999 तक चली.

  • साल 1999 में राज्य में फिर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को सत्ता से बेदखल किया. साल 2004 और 2009 में शिवसेना-बीजेपी ने साथ मिलकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ा. सभी चुनाव में इस गठबंधन को करारी हार झेलनी पड़ी.
ShivSena to fight 2019 Lok Sabha and Assembly elections alone. Decision taken in National Executive Meet today | शिवसेना का बीजेपी को बड़ा झटका,  NDA से हुई अलग, 2019 में अकेले लड़ेगी चुनाव

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  • साल 2014 में हुए आम चुनाव में भी बीजेपी ने शिवसेना के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा. बीजेपी को 23 सीट मिली वहीं शिवसेना 18 सीटों पर जीती. बीजेपी के इसी शानदार प्रदर्शन के बाद दोनों पार्टियों के रिश्ते में खटास आई. उसी साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी गठबंधन करने के लिए 288 में से 144 सीटें चाहती थीं. मगर शिवसेना 119 से अधिक सीटें देने के लिए तैयार नहीं थी.
  • दोनों पार्टियां अपने दम पर चुनाव में उतरी. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी मगर जादुई आंकड़े से दूर ही थी. तब शरद पवार की एनसीपी की मदद से देवेंद्र फडणवीस सूबे के मुखिया बने. शिवसेना कुछ दिनों तक विपक्ष में बैठी और एकनाथ शिंदे विपक्ष के नेता बने. लेकिन कुछ महीनो बाद शिवसेना महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल हुई. मगर दोनों के बीच रिश्तों में खटास जारी रही.
(Pic courtesy: PTI)

(पीटीआई )

  • पिछले साल हुए बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने सत्ताधारी शिवसेना के खिलाफ मोर्चा खोला. दोनों एक दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरे. चुनाव के बाद एक बार फिर दोनों पार्टियां साथ में आ गईं, लेकिन अब बीजेपी और शिवसेना पहले जैसे दोस्त नहीं रहे.

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  • शिवसेना हमेशा मोदी सरकार पर हमलावर रही हैं. चाहे बात नोटबंदी की हो या जीएसटी की, शिवसेना ने मोदी को निशाने पर लेते हुए इसे गलत कदम करार दिया. हाल ही में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने कहा था कि उनकी पार्टी एक वर्ष के भीतर बीजेपी नीत महाराष्ट्र सरकार छोड़ देगी.
  • कई लोग कहते हैं कि अगर आज बालासाहेब ठाकरे, प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे जिंदा होते तो यह गठबंधन कभी नहीं टूटता. 23 जनवरी 2018 को शिवसेना ने औपचारिक तौर पर रिश्ता खत्म होने का ऐलान कर दिया. यह एलान शिवसेना ने अपने संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की जयंती पर किया है. देश में 2019 में आम चुनाव होने हैं. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव भी अगले साल ही होने हैं.