मुंबई: महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बेलगाम का सीमा सम्बन्धी विवाद फिर से सुर्खियों में है. इस बार यह 70 साल पुराना विवाद कर्नाटक के मुख्यमन्त्री एच डी कुमारस्वामी के बेलगाम को कर्नाटक की दूसरी राजधानी बनाने के बयान के बाद शुरु हुआ है. Also Read - India Railway: बेंगलुरु-दिल्ली के बीच 19 सितंबर से चलेगी किसान रेल, जानें किन-किन राज्यों से कब गुजरेगी

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कर्नाटक राज्य के मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना ने गुरूवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार को बेलगाम मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय की शरण में जाना चाहिए और उससे दरख्वास्त करनी चाहिए कि, वह बेलगाम को कर्नाटक की दूसरी राजधानी बनाने के वहां के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के बयान को लेकर कर्नाटक सरकार को अवमानना नोटिस जारी करे.

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गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बेलगाम, जिसे कन्नड़ में बेलगावी भी कहा जाता है, की सीमा को लेकर विवाद चल रहा है. शिवसेना ने कहा कि ऐसी स्थिति में कुमारस्वामी द्वारा कथित रुप से दिया गया बयान उन लोगों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है जो महाराष्ट्र का हिस्सा बनना चाहते हैं.

जाने क्या है पूरा विवाद

बेलगाम जो वर्तमान में कर्नाटक राज्य का हिस्सा है, पहले बॉम्बे प्रेसीडेंसी का भाग था और महाराष्ट्र भाषा के आधार पर बेलगाम को अपना भाग बताता है. 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम द्वारा बेलगाम को भाषायी और प्रशासनिक कारणों से कन्नड़ बहुल कर्नाटक राज्य के अधीन कर दिया गया था जबकि बेलगाम में मराठी बोलने वालों की तादाद बहुत ज्यादा है.

क्या था मुख्यमन्त्री का बयान

मंगलवार को कुमारस्वामी ने कहा था कि उनकी सरकार उत्तरी कर्नाटक के लोगों के भेदभाव संबंधी आरोपों के समाधान के प्रयास के तहत बेलगाम में सुवर्ण विधान सौध में अपने कार्यालय स्थानांतरित करने पर विचार कर रही है. बेंगलुरु की विधानसभा, राज्य सचिवालय और विधानमंडल की तर्ज पर बेलगावी (बेलगाम) पर तैयार सुवर्ण विधान सौध केवल राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान काम करता है और साल के बाकी समय बंद रहता है.

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शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा, ‘‘कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने घोषणा की है कि बेलगाम को राज्य की दूसरी राजधानी बनाया जाएगा. यह उन लोगों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है जो महाराष्ट्र का हिस्सा बनना चाहते हैं.’’ शिवसेना ने कहा कि कर्नाटक सरकार अदालत में विचाराधीन मामले पर कैसे कोई निर्णय कर सकती है. उसने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को तत्काल इसका संज्ञान लेना चाहिए और उच्चतम न्यायालय में विरोध दर्ज कराना चाहिए.

पहले भी हो चुके हैं हिंसक आन्दोलन

बेलगाम को महाराष्ट्र में मिलाने की मांग को लेकर पहले भी कई हिंसक आन्दोलन हो चुके हैं और इसी साल मार्च में शिवसेना नेता संजय राउत ने बयान दिया था कि अगर जल्द ही इस विवाद को ‘लोकशाही’ से खत्म नहीं किया गया तो ‘ठोकशाही’ से खत्म किया जाएगा. ऐसे में इस तरीके की बयानबाजी किस ओर ले जाएगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा.