मुंबई: महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार को बंबई हाईकोर्ट से कहा कि कोरेगांव-भीमा हिंसा और माओवादियों के साथ संबंध रखने के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता सरकार को उखाड़ फेंकने के भाकपा (माओवादी) के मंसूबे को पूरा करने के लिए दलितों को लामबंद कर रहे थे. पुलिस के हलफनामे के अनुसार जांच के दौरान खुलासा हुआ कि भाकपा (माओवादी) का मंसूबा राजनीतिक सत्ता हथियाना है. उसमें कहा गया है, इस उद्देश्य को हासिल करने की दृष्टि से संगठन लोगों को सैन्य और राजनीतिक रूप से बड़े पैमाने पर लामबंद कर न केवल पारंपरिक लड़ाई, बल्कि जनयुद्ध भी छेड़ रहा है. पुलिस ने हलफनामे में कहा, भाकपा (माओवादी), दलितों के बीच पार्टी को खड़ा करने का विशेष प्रयास कर रही है. वह अपने मंसूबे को हासिल करने के लिए दलितों को उनके आत्सम्मान, ऊंची जातियों की सामंती शक्तियों द्वारा भेदभाव, उत्पीड़न एवं शारीरिक हमले के विरुद्ध बड़े पैमाने पर संघर्ष के लिए लामबंद करने की कोशिश करती है. हलफनामें में कहा गया है कि उद्देश्य कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों की हत्या करना और लोगों में आतंक फैलाना था.

5 अप्रैल को जमानत पर होगी सुनवाई
पुणे के सहायक पुलिस आयुक्त शिवाजी पवार ने आरोपियों में एक — अरूण फरेरा की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अदालत में दाखिल किए गए हलफनामे में यह बात कही है. पुलिस ने फरेरा के अलावा अन्य आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें वर्नोन गोंजालविस, सुधा भारद्वाज, वी वरवर राव, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बड़े आदि हैं. फरेरा और गोंजालविसस ने बाद में जमानत अर्जी लगाई थी, जो बुधवार को न्यायमूर्ति पी एन देशमुख के समक्ष आई. न्यायमूर्ति ने इस पर अगली सुनवाई की तारीख पांच अप्रैल तय की है. पुलिस ने गोंजालविस की याचिका पर अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं किया है.

आरोपियों का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन से
पुणे पुलिस ने अपने हलफनामे में दावा किया कि फरेरा और अन्य आरोपी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ सदस्य हैं. पुलिस ने कहा कि आरोपी कानून द्वारा स्थापित सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए इस प्रतिबंधित संगठन की गैर कानूनी गतिविधियों में सहयोग कर रहे थे और उनका प्रचार कर रहे थे.

आरोपियों ने उत्तेजक, भड़काऊ और विद्रोही भाषण दिया
पुलिस ने कहा कि 31 दिसंबर, 2017 को एल्गार परिषद की बैठक में फरेरा और अन्य आरोपियों ने उत्तेजक, भड़काऊ और विद्रोही भाषण दिया और उसमें बड़ी संख्या में दलित संगठनों ने हिस्सा लिया. हलफनामे में कहा गया है, इन दलित संगठनों को भाकपा (माओवादी) के कुछ सक्रिय सदस्यों ने सुनियोजित तरीके से एक साथ लाया. भाकपा (माओवादी) के इन सदस्यों ने बैठक के लिए पैसे भी दिए.

हिंसा से सरकार गिराने की मंशा
हलफनामे में कहा गया है, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भाकपा (माओवादी) के साथ मिलकर फरेरा और अन्य आरोपियों की मंशा हिंसक माध्यम से यानी अराजकता, आतंक और नफरत फैलाकर, लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई (केंद्र और राज्य) की सरकारों को गिराना है. उसमें कहा गया है कि उद्देश्य कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों की हत्या करना और लोगों में आतंक फैलाना है.

वैमनस्य भड़काने के लिए पर्चे बांटे
पुलिस के अनुसार फरेरा और अन्य आरोपियों ने धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य भड़काने के लिए पर्चे और पुस्तिकाएं बांटीं. परिणाम था कोरेगांव भीमा में एक जनवरी, 2018 को दंगा फैला.