नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले के सिलसिले में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं गौतम नवलखा और आनंद तेल्तुम्बडे की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी. शीर्ष अदालत ने 6 मार्च को इन दोनों को गिरफ्तारी से प्राप्त अंतरिम संरक्षण की अवधि 16 मार्च तक के लिए बढ़ा दी थी. Also Read - COVID-19: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- निजी लैब्स में भी मुफ्त में हो कोरोना की टेस्टिंग

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने दोनों कार्यकर्ताओं को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. पीठ ने इन दोनों को अपने पासपोर्ट तत्काल जमा कराने का भी निर्देश दिया है. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

बता दें कि‍ शीर्ष अदालत ने 6 मार्च को इन दोनों को गिरफ्तारी से प्राप्त अंतरिम संरक्षण की अवधि 16 मार्च तक के लिए बढ़ा दी थी. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

पुणे की सत्र अदालत से राहत नहीं मिलने पर गौतम नवलखा और आनंद तेल्तुम्बडे ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले साल नवंबर में बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ इन दोनों कार्यकर्ताओं ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी.

पुणे की पुलिस ने कोरेगांव भीमा गांव में एक जनवरी, 2018 को हुयी हिंसा की घटना के बाद गौतम नवलखा, आनंद तेल्तुम्बडे और कई अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ माओवादियों से संपर्क रखने के आरोप में मामला दर्ज किया था. इन कार्यकर्ताओं ने पुलिस के इन आरोपों से इनकार किया था.