नई दिल्लीः लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूर अपने अपने घरों तक पहुंचने के लिए परेशान हैं और इसी के चलते वे बिना कुछ सोचे समझ जैसे समझ में आ रहा है हजारों किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रहे हैं. प्रवासी मजदूरों के साथ औरंगाबाद की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है. अब इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. एक चश्मदीद ने सामने आकर बताया कि आखिर उस रात रेलवे ट्रैक पर ऐसा क्या हुआ था जो मजदूरों के साथ इतनी बड़ी घटना घट गई. Also Read - उद्धव सरकार के दूसरे मंत्री को हुआ कोरोना, महाराष्ट्र के पूर्व CM अशोक चव्हाण पाए गए पॉजिटिव

आपको बता दें कि इस घटना में 16 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी. इस पूरे मामले में एक चश्मदीद  सामने आया है जिसका नाम धीरेंद्र सिंह है. उसका कहना है कि वह भी उन्हीं मजदूरों के समूह में था जो लोग ट्रेन पटरी की घटना के शिकार हुए.  चश्मीदद ने बतयाा कि हम सभी लोग महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश अपने गांव जा रहे थे. Also Read - चीन का बड़ा आरोप, कहा- द्विपक्षीय संबंधों को 'नए शीत युद्ध' की ओर धकेल रहा है अमेरिका

उसने बताया कि हम गुरुवार की शाम सात बजे निकले थे और सुबह चार बजे तक लगातार चलते रहे. चलने की वजह से सभी लोग बुरी तरह से थक गए थे. धीरेंद्र के अनुसार सभी श्रमिकों ने सोचा कि थोड़ा आराम कर लेते हैं और फिर सुबह होते ही आगे का सफर तय करेंगे. उसने कहा कि हम और मेरे कुछ साथी बांकी लोगों से थोड़ी दूरी पर थे. उसने बाताय कि वे सभी लोग आराम करने के लिए पटरी पर बैठ गए और धीरे धीरे सो गए.

धीरेंद्र ने कहा कि जब मैंने देखा कि ट्रेन आ रही है तो मैंने उनको आवाज भी दी लेकिन थकान होने की वजह से इतनी गहरी नींद में थे कि उन्हें मेरी आवाज सुनाई नहीं दी.

उसने बताया कि हम सभी ने एक सप्ताह पहले पास के लिए आवेदन किया था लेकिन लॉकडाउन के चलते कुछ भी काम नहीं हो पा रहा था. हम सभी पूरी तरह से बेरोजगार हो गए और हमारे पास पैसे भी खत्म हो गए थे इसलिए हमने गांव जाने का फैसला लिया.