मुंबई: शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है, शिवसेना को बीजेपी और एनसीपी की राजनीति से कोई झटका नहीं लगा है. बीजेपी और एनसीपी का अवैध राजनीतिक संबंध पुराना है और वर्तमान महाराष्ट्र सरकार मूल रूप से इसी संबंध से जन्मी है. उसने कहा, ”अहमदनगर के नए पैटर्न से बस यही उजागर हुआ है.” दरअसल, अहमदनगर में हुए महापौर चुनाव में 68 सदस्यीय इस नगर निकाय में बीजेपी के महज 14 सीटें जीतने के बावजूद उसके नेता बाबासाहब वकाले पिछले हफ्ते वहां के महापौर निर्वाचित हुए. एनसीपी के 18 पार्षदों, बहुजन समाज पार्टी के चार और एक निर्दलीय सदस्य से वकाले के पक्ष में वोट डाला. शिवसेना 24 सीटों के साथ अहमदनगर नगर निकाय में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी. कांग्रेस के पांच पार्षद मत-विभाजन से दूर रहे. Also Read - Aaj Ka Panchang 3 December 2020: आज कृष्ण पक्ष तृतीया पर देखें पंचांग, शुभ-अशुभ समय, राहुकाल

शिवसेना ने सोमवार को कहा कि अहमदनगर के महापौर के चुनाव में एनसीपी द्वारा बीजेपी का समर्थन किया जाना उसके लिए कोई झटका नहीं है बल्कि यह नया पैटर्न पुराने अवैध राजनीतिक संबंधों को उजागर करता है. Also Read - CBSE Board Exam 2021 Latest Updates: 10वीं, 12वीं की परीक्षा ऑनलाइन होगी या लिखित? बोर्ड ने दी यह जानकारी

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है, शिवसेना को बीजेपी और एनसीपी की राजनीति से कोई झटका नहीं लगा है. बीजेपी और एनसीपी का अवैध राजनीतिक संबंध पुराना है और वर्तमान महाराष्ट्र सरकार मूल रूप से इसी संबंध से जन्मी है. उसने कहा, ”अहमदनगर के नए पैटर्न से बस यही उजागर हुआ है.” Also Read - Farmers Protest: सरकार और किसानों के बीच बैठक से पहले आज गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे पंजाब के CM अमरिंदर सिंह

शिवसेना के मुखपत्र सामना ने इस बात को याद किया कि 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरने के बाद राकांपा ने उसे बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की थी. उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना ने कहा, वे कहते रहते हैं कि उनके बीच कोई अवैध संबंध नहीं है. लेकिन इसने (अहमदनगर के महापौर चुनाव ने) उन्हें बेनकाब कर दिया है. महाराष्ट्र उन पर हंस रहा है.