मुंबई: महाराष्ट्र के बीड़ जिले में भाजपा की ‘नाराज’ नेता पंकजा मुंडे द्वारा अपने पिता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की याद में गुरुवार को बुलाई गई सभा में पार्टी का प्रतीक चिन्ह कमल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य नेताओं की तस्वीरें दिखाई नहीं दे रही हैं. इसके बाद फिर उनके और पार्टी के रिश्‍तों को लेकर नई अटकलबाजी शुरू हो गई है.

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पंकजा ने महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर अपनी “भविष्य की योजना” को लेकर इस महीने की शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी. महाराष्ट्र में हाल ही में बीजेपी की पूर्व सहयोगी शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई है.

पंकजा ने अपने समर्थकों को भाजपा के दिग्गज नेता रहे अपने पिता गोपीनाथ मुंडे की याद में 12 दिसंबर को परली के गोपीनाथगढ़ में होने वाले कार्यक्रम में आमंत्रित किया था.

हालांकि पूर्व मंत्री पंकजा ने स्पष्ट किया था कि वह भाजपा नहीं छोड़ रहीं. सभी की निगाहें बृहस्पतिवार को होने वाले कार्यक्रम पर टिकी हैं. उम्मीद है कि वह कोई घोषणा कर सकती हैं.

महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चन्द्रकांत पाटिल से बुधवार को कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर पंकजा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कोई भाजपा नहीं छोड़ेगा.

पंकजा की बहन और बीजेपी सांसद प्रीतम मुंडे ने बीड़ में बैनरों में प्रधानमंत्री, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वे गोपीनाथ मुंडे की छवि को किसी विशेष राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रखना चाहते.

प्रीतम ने मीडियाकर्मियों से कहा,मेरे पिता एक सार्वजनिक व्यक्तित्व थे. राजनीति और विभिन्न वर्ग के लोगों के बीच उनके प्रति गहरा सम्मान है. हमने भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल के साथ-साथ मोदीजी या शाहजी की तस्वीरों का इस्तेमाल इसलिए नहीं किया, क्योंकि हम गोपीनाथ मुंडे की छवि को किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रखना चाहते.”

बता दें अक्टूबर में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पंकजा मुंडे को बीड़ जिले की परली विधानसभा सीट पर अपने चचेरे भाई और एनसीपी उम्मीदवार धनंजय मुंडे के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. तब से उनकी भविष्य की योजना को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं.