महाराष्ट्र में मुंबई के साथ 9 अन्य शहरों में नगर निकाय चुनाव के लिए प्रचार अभियान रविवार शाम थम गया। मिनी विधानसभा चुनाव बताये जा रहे इस नगर निकाय चुनाव में 10 नगर निगमों में 1.94 करोड़ से अधिक मतदाता हैं । मतदान 21 फरवरी को है। उसी दिन 11 जिला परिषदों के लिए दूसरे चरण का मतदान है। पहले चरण में 16 फरवरी को 15 जिला परिषदों में वोट डाले गये थे। यह भी पढ़े:  एआईएमआईएम केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि सभी समाज के लिए काम करेगी- विधायक वारिस पठान

बात की जाए मुंबई की तो वहाँ भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में घमासान शुरू है। कांग्रेस और एनसीपी इस विवाद से ज़्यादा फायदा उठाती नज़र नहीं आ रही है। इसी विषय पर हमने पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख अशोक चव्हाण से बात की।

सवाल: शरद पवार ने कहा है कि वह लिख कर देने के लिए तैयार है की एनसीपी बीजेपी को आगे से समर्थन नहीं देंगे, शिवसेना को भी उन्होंने ऐसी ही चुनौती दी है, आप क्या कहेंगे?
अशोक चव्हाण: मैं उनकी बात का स्वागत करता हूं। शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी की सरकार से लोग परेशान है। लोग बदलाव चाहते है और जितनी जल्दी यह सरकार चली जाये वह बेहतर है। यह फैसला शिवसेना को करना है। शिवसेना स्वाभिमान, मराठी माणूस की जो उनकी बातें रहती थी वह (बीजेपी) कितनी बुरी तरह से उन्हें पिट रहे है। सही में अगर मराठी आदमी का स्वाभिमान अभी भी कायम है तो इस्तीफा सौंप दे।

सवाल: अगर मध्यावधि चुनाव होते है तो कांग्रेस किसी के साथ गठबंधन या अपने दम पर चुनाव लड़ेगी?
अशोक चव्हाण: हमारा तो किसी भी सुरत में शिवसेना या बीजेपी से गठबंधन का सवाल ही नहीं उठता। बात है चुनाव की तो हमारी पूरी तयारी है। मगर मुझे लगता शिवसेना सत्ता नहीं छोड़ेगी।

सवाल: बीजेपी पारदर्शिता की बात कर रही है, इसपर आपका क्या ख्याल है?
अशोक चव्हाण: 22 साल में पारदर्शिता नहीं दिखाई दी। 22 साल से शिवसेना और बीजेपी साथ है, जो भी घोटाले हुए इसमें दोनों का हिस्सा बराबर है। 22 साल में क्यों बात नहीं की, आम आदमी यही बात कर रहे है।

सवाल: शिवसेना के साथ अलीबाग में हुए गठबंधन के बारे में आप क्या कहेंगे?
अशोक चव्हाण: हमने इस प्रकार के किसी भी गठबंधन को मंजूरी नहीं दी है। हमने उन्हें चेतावनी दी है और चुनाव के बाद हम उचित कार्रवाई करेंगे।

सवाल: क्या एमआईएम की वजह से कांग्रेस पर असर पडेगा?
अशोक चव्हाण: लोगों को एहसास हो गया है कि बीजेपी, एमआईएम का इस्तेमाल कर रही है। लोगों को अब यह बात समझ में आ गई है कि एमआईएम को वोट देने का मतलब है बीजेपी को वोट देना। यह बात साफ़ है, एमआईएम चुनाव जीत तो नहीं सकती मगर वह कांग्रेस के वोट काटने या मुस्लिम वोट बांटने के लिए चुनावी मैदान में उतरे है और यह बीजेपी की रणनीति है।

सवाल: कुछ जगहों पर कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन हुआ है, मुंबई या अन्य जगहों पर ऐसा क्यों नहीं हुआ?
अशोक चव्हाण: यह सब स्थानीय कैमेस्ट्री पर निर्भर करता है। जहां पार्टी के लोकल लीडर को लगा की गठबंधन हो सकता है वहां हुआ, जहां नहीं हो सका वहां हम अकेले मैदान में उतरे। जहां संभव था वहां हमने किया।