बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बजट पेश किया। जेटली द्वारा पेश किये बजट की शिवसेना ने आलोचना की है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बजट पर टिपण्णी देते हुए कहा की हर साल बजट की क्या जरूरत जब पिछले वादे पूरे नहीं हुए। उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘‘उन्होंने पिछले बजट में यह घोषणा क्यों नही की थी कि वे नोट बंद करेंगे। जब पिछले साल की घोषणाएं अधूरी हैं तो इस बजट का क्या मतलब है? जब आप अपने किये वादे पूरे नहीं करते तो हर साल बजट पेश करने की क्या जरूरत है।’’Also Read - Maharashtra Flood: बाढ़ प्रभावित कोल्हापुर जिले में 'एक साथ' पहुंचे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस

शिवसेना अध्यक्ष ने आगे यह भी कहा की, ‘‘नोटबंदी की वजह से जनता को जो परेशानी हुई, उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। सरकार कह सकती है कि जमा धन कई गुना बढ़ गया लेकिन सच यह है कि बड़े चूककर्ताओं को अलग रखा गया और आम आदमी की जेब काटी गयी।’’ Also Read - Maharashtra Lockdown Latest Update: पुणे, रायगढ़, सतारा समेत महाराष्ट्र के इन 11 जिलों में बढ़ाई जाएगी पाबंदी, जानें ताजा अपडेट...

वही, दक्षिण मुंबई से शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने कहा की बजट में नौकरी पेशा लोगों को तो राहत दी है मगर किसानों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को पूरी तरह भूल गयी । उन्होंने सस्ते आवासों को बुनियादी संरचना का दर्जा दिये जाने के फैसले पर भी नाखुशी जताई। सावंत ने कहा, ‘‘बजट में वेतनभोगियों को राहत दी गयी है, वहीं पूरी तरह किसानों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को भुला दिया गया है और उनके लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।’’ Also Read - Maharashtra Lockdown Update: महाराष्ट्र सरकार से मॉल, शॉपिंग सेंटर खोलने का आग्रह, जानें खुदरा विक्रेताओं के संगठन की क्या है मांग...

इस बीच आज शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा है की अरुण जेटली ने शायरी कर उत्साह भरने की कोशिश की मगर नोटबंदी के बाद भविष्य में सपने दिखाने का काम अरुण जेटली को करना पडा। नोटबंदी का फैसला फ्लॉप हो गया इसका अंदाज़ अभी सरकार को भी आ गया है।