नई दिल्‍ली: वीर सावरकर पर कांग्रेस सेवा दल की आपत्तिजनक बुकलेट का मामला सामने आने के बाद उनके पोते रंजीत सावरकर शुक्रवार को महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करने पहुंचे, लेकिन सीएम ने उन्‍हें इस पर चर्चा करने के लिए एक मिनट का वक्‍त भी नहीं दिया. रंजीत ने इसे अपना तो नहीं, लेकिन सावरकर का अपमान बताया. वहीं, पूर्व मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से सेवा दल द्वारा बांटी गई किताब को प्रतिबंधित करने की मांग की. किताब में एक देशभक्त के तौर पर विनायक दामोदर सावरकर की साख पर सवाल उठाए गए हैं.

वीर सावरकर के पोते रंजीत ने कहा, मैं सीएम से मिलने आया था. मैंने पहले भी उनसे मुलाकात के लिए कई निवेदन भेजे, लेकिन वह मुझसे आज भी नहीं मिल सके. उनके पास मुझसे बात करने के लिए एक मिनट का भी वक्‍त नहीं है, जब यह सावरकर जी के सम्‍मान के बारे में है. मैं बहुत अधिक निराश हूं. यह सावरकर जी का अपमान है.

दरअसल, सेवा दल ने भोपाल में अपने प्रशिक्षण शिविर में ‘वीर सावरकर कितने वीर’ नाम पुस्तक का वितरण किया है. इसमें डॉमिनिक लैपिएर और लैरी कॉलिन की किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि सावरकर और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के बीच समलैंगिक संबंध थे.

रंजीत ने कहा, कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए, साथ में राहुल गांधी और कांग्रेस सेवा दल पर सावरकर जी के खिलाफ आरोप लगाने के लिए भी मामला दर्ज क‍िया जाए.

सावरकर की छवि धूमिल करने वाली किताब को प्रतिबंधित करें उद्धव: फडणवीस
भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस नेमुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से सेवा दल द्वारा बांटी गई किताब को प्रतिबंधित करने की मांग की. किताब में एक देशभक्त के तौर पर विनायक दामोदर सावरकर की साख पर सवाल उठाए गए हैं. ”वीर सावरकर कितने ‘वीर’?” शीर्षक से हिंदी में प्रकाशित किताब को मध्य प्रदेश में कांग्रेस से संबद्ध संगठन के शिविर में बांटा गया था.

कांग्रेस ने ऐसी किताब बांटकर अपनी दुष्ट मानसिकता का परिचय दिया
किताब में आरोप लगाया गया है कि अंडमान सेलुलर जेल से रिहा होने के बाद सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने पेंशन दी थी और उनके और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे के बीच शारीरिक संबंध थे. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस ने ऐसी किताब बांटकर अपनी दुष्ट मानसिकता का परिचय दिया है, जो उसके बौद्धिक दिवालिएपन को दिखाती है.

हिंदू हृदय सम्राट चिरपरिचित अंदाज में प्रतिक्रिया देते
फडणवीस ने कहा, भाजपा इस किताब की कड़ी निंदा करती है. आदरणीय हिंदू हृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे आज अगर हमारे बीच होते तो वह अपने चिरपरिचित अंदाज में इस पर (किताब पर) सबसे पहले प्रतिक्रिया देते.

सावरकर का बार-बार अपमान झेलती रहेगी शिवसेना?
फडणवीस ने इस बारे में कई ट्वीट किए. उन्होंने कहा, ”आज ऐसी उम्मीद तो नहीं की जा सकती लेकिन आशा है कि मुख्यमंत्री इस किताब को प्रतिबंधित करने की तत्काल घोषणा करें.” उन्होंने शिवसेना से यह भी जानना चाहा कि ऐसी दिवालिया पार्टी के साथ अप्राकृतिक गठबंधन बनाने वाली शिवसेना क्या सत्ता की खातिर अपने देवता तुल्य सावरकर का बार-बार अपमान झेलती रहेगी.

यह उनके दिमाग की ‘गंदगी’ को दिखाता है: राउत
इससे पहले दिन में शिवसेना सांसद संजय राउत ने इस किताब की आलोचना की. राउत ने कहा, वीर सावरकर एक महान शख्सियत थे और वह हमेशा महान रहेंगे. एक धड़ा हमेशा उनके खिलाफ बोलता रहा है. यह उनके दिमाग की ‘गंदगी’ को दिखाता है. बता दें पिछले महीने कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने निशाना साधते हुए कहा था कि उनका नाम राहुल सावरकर नहीं है और इसके लिए (बलात्कार वाली अपनी टिप्पणी पर) वह कभी माफी नहीं मांगेंगे, इस पर शिवसेना नाराज हो गई थी. (इनपुट: एजेंसी)